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वाह वाह रम्ज़ सजण दी होर……आबिदा परवीन

किसी गीत को ढंग से समझने के लिये उस भाषा का अच्छे ढंग से आना जरूरी है लेकिन किसी संगीत का लुत्फ उठाने के लिये ये जरूरी नही कि आपको सुर-ताल-राग सभी का ज्ञान हो और गायकी की मिठास तो ना चाहते हुए भी कानों में घुसकर मिस्री सा मजा देकर रहेगी। अभी जब मैं [...]

[ More ] January 12th, 2009 | 6 Comments | Posted in Sufi Poetry and Music |