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मैली चादर ओढ़ के कैसे

बचपन में जब हम सोते से उठते थे तो बड़े ही मीठे मीठे भजन सुनायी पड़ते थे, उनमें से एक था मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ। हालाँकि उम्र के उस पड़ाव में भजनों से उतना अटेचमेंट नही होता जितना उम्र के आखिरी दौर में लेकिन फिर भी कुछ भजन ऐसे थे जो [...]

[ More ] July 11th, 2010 | 2 Comments | Posted in Spiritual (Bhajan) |

शर्मा बंधुओं को सुनियेः जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को

जब मैं छोटा था तब दूरदर्शन में अक्सर एक भजन बजता (सुनता) हुआ दिखायी देता, भजन की कुछ समझ ना होने के बावजूद भी वो सुनने में बहुत मधुर लगता था। आज अचानक फिर से सुना तो मन को वैसा ही सुकून मिला जैसे तपती दोपहरी में छावँ में खड़े होने पर या पानी की [...]

[ More ] March 30th, 2009 | 11 Comments | Posted in Spiritual (Bhajan) |

करना फकीरी फिर क्या दिलगीरी सदा मगन में रहना जी

पहेली नंबर ३ में बाजी मारी है सागर भाईसा ने। वो भजन था मीराबाई का लिखा हुआ जिसे फिल्म मीरा से लिया गया था। इसके संगीतकार थे पंडित रविशंकर जी और इसे गाया था वाणी जयराम। ये वो ही हैं जिन्होंने फिल्म गुड्डी का गीत बोले रे पपिहरा गाया था, अफसोस कि वाणी जयराम से [...]

[ More ] November 4th, 2008 | 6 Comments | Posted in Spiritual (Bhajan) |