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Holi: होली की मदहोशी आबिदा परवीन, शोभा गुर्टू और छन्नूलाल मिश्रा की आवाज के साथ

होली के अवसर पर लिखी इस पोस्ट में क्लासिकल और फिल्मी गीतों के द्वारा आनंद लेंगे होली की मस्ती का। अक्सर होली के आते ही फिजा में रेडियो और टेलिविजन के माध्यम से सुनायी पड़ते हैं होली के गीत। ये गीत मुख्यतया फिल्मी होते हैं और अक्सर चुनिंदा फिल्मों के वो ही चुनिंदा गीत होते [...]

[ More ] February 24th, 2010 | 8 Comments | Posted in Filmy, Holi Songs, Non Filmy, Raaga Based Songs |

सावन की रिमझिम में थिरक थिरक नाचे रे मन्ना दा

मन्ना डे के गाये जितने मधुर फिल्मी गीत होते हैं उतने ही मधुर होते हैं नॉन फिल्मी गीत, अगर मेरी बात का विश्वास नही तो हाथ कंगन को आरसी क्या खुद ही इस गीत को सुनकर डिसाइड कर लीजिये। ये गीत किसी भी एंगिल से नॉन फिल्मी नही लगता लेकिन हकीकत यही है कि है। [...]

[ More ] September 1st, 2009 | 1 Comment | Posted in Non Filmy |

यसुदास को सुनिये चमक चम चम

मुझे यसुदास के गाये सभी हिंदी गीत तो पसंद हैं ही उनकी आवाज भी बहुत पसंद है। ऐसा ही उनका गाया एक गीत बहुत पहले इंडिया में टीवी में आ रहे किसी विडियो में देखा था। आज वो गीत जब दोबारा सुनने को मिला तो सोचा क्यों ना इसे यहाँ डाल दिया जाय जिससे जब [...]

[ More ] July 30th, 2009 | 5 Comments | Posted in Non Filmy |

मधुशाला: सुन कल-कल छल-छल मधुघट से

सन् 1935 में 135 रूबाईयों (चार लाईन की छंद टाईप कविता) को अपने में सिमटी एक किताब छपी थी, नाम था मधुशाला और इसे लिखा था हरिवंश राय बच्चन ने। इसी मधुशाला ने हरिवंश राय बच्चन को नाम और प्रसिद्धि दोनों दिलाया। मधुशाला एक ट्राईओलोजी (Triology) का हिस्सा थी जो इन्होंने उमर खय्याम की रूबाईयों [...]

[ More ] November 7th, 2008 | 4 Comments | Posted in Non Filmy |