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राखीः मेरे भैय्या मेरे चंदा, फूलों का तारों का सबका कहना है

आज राखी है यानि रक्षा बंधन यानि भाई-बहन का पर्व, अन्य त्यौहारों की तरह हिंदी फिल्मों में राखी पर भी काफी गीत लिखे गये हैं। इन गीतों में भाई और बहिन के प्यार को, एक दूसरे के लिये इनकी भावनाओं को बड़ी सुन्दरता से दिखाया गया है। इनमें से कुछ गीत स्पेशियली राखी के ऊपर [...]

[ More ] August 24th, 2010 | 5 Comments | Posted in Golden Melody, Situational |

वैलेंटाईन डे स्पेशियलः लव स्टोरी के लव में ट्विस्ट

एक बार फिर वही दिन, कहाँ से दिन शुरू हुआ कहाँ कहाँ फैल गया। आज के दिन कोई गुलाबी गुलाबी होकर घूमे तो कोई मुँह काला करके, विरोध का रंग काला ही होता है ना। युवाओं में बड़ा जोश होता है वैलेंटाईन डे मनाने का, वैसे ही जैसे अधजल गगरी की कहानी, अरे वो ही [...]

[ More ] February 14th, 2010 | 1 Comment | Posted in For Your Valentine, Romantic, Situational |

तुम्हारा इश्क इश्क और हमारा इश्क बच्चा है जी

याद है वो एक पुराना विज्ञापन जो टीवी में आता था जिसमें एक महिला अपने पति को कहती थी, अब तो बड़े बन जाईये। याद है वो टाईम जब आप को कहा जाता था, ये जिद वगैरह छोड़ो अब तुम बच्चे नही हो, बड़े हो गये हो या फिर ये बच्चों जैसी हरकतें छोड़ो और [...]

[ More ] January 30th, 2010 | 9 Comments | Posted in Filmy, Romantic, Situational |

सूरज जरा, आ पास आ, आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम

संगीत किसी भी गीत की मधुरता के लिये चार चाँद लगाने का काम करता है, किसी भी गीत के कर्णप्रिय या मधुर होने का ज्यादातर श्रेय या तो संगीतकार को चला जाता है या इसके गाने वाले को। उस गीत को लिखने वाले का नाम बहुत कम ही लिया या याद किया जाता है। आज [...]

[ More ] January 16th, 2010 | Comments Off | Posted in Filmy, Situational |

पीतल की मेरी गागरी दिल्ली से मोल मंगायी रे

अफलातूनजी ने जब जयदेव का संगीत सुनाया तो मुझे ध्यान आया ये गीत, वैसे तो जयदेव साहब के संगीतबद्ध किये बहुत सारे मधुर गीत हैं लेकिन मुझे ये थोड़ा जुदा लगता है। ये गीत शायद बहुत कम लोगों ने सुना हो ये भी एक वजह है इसे सलेक्ट करने की। इस गीत को लिखा है [...]

[ More ] August 22nd, 2009 | 5 Comments | Posted in Situational |

हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है

1971 में संपूरण सिंह कालरा निर्देशित फिल्म आयी थी, नाम था मेरे अपने और यही संपूरण सिंह यानि गुलजार के फिल्म निर्देशन की शुरूआत भी थी। इस फिल्म की कहानी एक विधवा और कुछ दिशाहीन, बेरोजगार और अनाथ युवक (युवकों) के इर्दगिर्द घूमती है। फिल्म में मुख्य भूमिका थी मीना कुमारी, विनोद खन्ना और शत्रुघ्न [...]

[ More ] November 23rd, 2008 | 5 Comments | Posted in Situational |