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पत्थर से शीशा टकरा के वो कहते हैं दिल टूटे ना

“वक्त के सांचे में अपनी जिंदगी को ढाल कर, मुस्कुराओ मौत की आँखों में आँखें डालकर“, इन बेहतरीन लाईनों के साथ शुरू होता गीत “पत्थर से शीशा टकरा के” जिसे पहेली ८ में पहचानने को कहा गया था। ये खुबसूरत गीत है फिल्म सावन को आने दो से, राजश्री प्रोडक्शन की १९७९ में आयी इस [...]

[ More ] January 19th, 2009 | 9 Comments | Posted in Happy Go Lucky |

श्यामल श्यामल बरण

मुझे लगा था पहेली कठिन होगी लेकिन जिसने भी बताया सही उत्तर बताया, वो गीत था श्यामल श्यामल बरन, कोमल कोमल चरन, फिल्म नवरंग से। गायक थे महेन्द्र कपूर, ये इनके शुरूआती दौर के गीतों में से था और मो रफी के इनफ्लुएंस की वजह से कुछ कुछ वैसा ही सुनायी भी देता था लेकिन [...]

[ More ] January 11th, 2009 | 7 Comments | Posted in Romantic |

तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नही

पिछली पहेली में अब तक के रिकार्ड उत्तर आये साथ में सभी ने गीत को पहचान भी लिया। वो डॉयलाग फिल्म आंधी के मधुर गीत ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नही‘ के मध्य से लिया गया था। इस खुबसूरत गीत को संगीतबद्ध किया था राहुल देव बर्मन ने और शब्दों से सजाया (यानि [...]

[ More ] January 8th, 2009 | 5 Comments | Posted in Romantic |

आज के इस इंसान को ये क्या हो गया

मेरे आल टाईम पसंदीदा कवि हैं “कवि प्रदीप” यानि रामचंद्र बरायनजी द्विवेदी। आज पेश है इन्हीं की एक बेहतरीन रचना जो आज के दौर को बहुत सटीक बयाँ करती है। ये कविता (गीत) इन्होंने फिल्म “अमर रहे ये प्यार” के लिये लिखा था। ये फिल्म रीलिज हुई थी सन् 1963 में। इसमें मुख्य भूमिका निभायी [...]

[ More ] January 2nd, 2009 | 7 Comments | Posted in kavi pradeep |

हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है

1971 में संपूरण सिंह कालरा निर्देशित फिल्म आयी थी, नाम था मेरे अपने और यही संपूरण सिंह यानि गुलजार के फिल्म निर्देशन की शुरूआत भी थी। इस फिल्म की कहानी एक विधवा और कुछ दिशाहीन, बेरोजगार और अनाथ युवक (युवकों) के इर्दगिर्द घूमती है। फिल्म में मुख्य भूमिका थी मीना कुमारी, विनोद खन्ना और शत्रुघ्न [...]

[ More ] November 23rd, 2008 | 5 Comments | Posted in Situational |

क्या मौसम है, ऐ दिवाने दिल चल कहीं दूर निकल जायें

गीत पहेली नंबर ४ जितनी आसान थी उतने जवाब आये नही लेकिन फिर भी अभी तक पूछी सभी पहेलियों का उत्तर कोई ना कोई सही दे ही दे रहा है। इस बार की पहेली का सही उत्तर बताया RA ने और उनसे ये उम्मीद तो हम कर ही सकते थे। ये क्लिप थी फिल्म दूसरा [...]

[ More ] November 13th, 2008 | 3 Comments | Posted in Romantic |

अंखियों के झरोखों से तूने देखा जो साँवरे

पहेली नंबर २ का गीत सभी लोगों ने पहचान लिया ये अपेक्षाकृत आसान था, गीत था अंखियों के झरोखों से फिल्म का टाईटिल गीत। इस गीत को संगीत से सजाया था रविन्द्र जैन ने और उन्होंने ही इसे लिखा भी था और स्वर दिया था हेमलता ने। इस फिल्म का दूसरा खुबसूरत गीत है ‘बड़े [...]

[ More ] October 29th, 2008 | 3 Comments | Posted in Romantic |

अभी तो हाथ में जाम है

जरा याद करो १९७२ में आयी फिल्म सीता और गीता, फिर याद करो शराब की बोतल हाथ में लिये लड़खड़ाता हुआ धर्मेन्द्र। क्या याद आया? मन्ना डे का गाया हुआ यही गीत ना। मुझे इस फिल्म का ये गीत सबसे ज्यादा पसंद है, इसे बहुत बार सुना है, फिर भी अभी तक मन नही भरा, [...]

[ More ] October 23rd, 2008 | 6 Comments | Posted in Drunkard (sharabi) |