< Browse > Home / Classical / Blog article: ठुमक ठुमक पग दुमक कुंज मधु (अनकही) – पंडित भीमसेन जोशी

| Mobile | RSS

ठुमक ठुमक पग दुमक कुंज मधु (अनकही) – पंडित भीमसेन जोशी

January 25th, 2011 | 1 Comment | Posted in Classical

पंडित भीमसेन जोशी अपना सुर मिलाने हमसे बहुत दूर चले गये, आज इस पोस्ट के मार्फत उनको विनम्र श्रृद्धांजलि फिल्म अनकही के लिये गाये उनके इस विशेष गीत से। पंडितजी के बारे में मुझे कुछ मालूम नही था, और सबसे पहले उनके बारे में पता चला जब दूरदर्शन में पहली बार बजा “मिले सुर मेरा तुम्हारा“, जिसमें वो खुद भी दिखायी दिये। उस समय काफी छोटा था शास्त्रीय क्या संगीत तक की समझ नही थी (हालांकि शास्त्रीय संगीत में तो अभी भी फीस माफ है) लेकिन “मिले सुर मेरा तुम्हारा” जैसे जुबान में अच्छे से बैठ गया।

फिर अमोल पालेकर निर्देशित एक क्लासिकिल फिल्म देखी, नाम था “अनकही“। जिसमें जयदेव के संगीत निर्देशन में पंडितजी के गाये दो गीत भी थे, एक था तुलसीदास जी द्वारा लिखा हुआ “रघुवर तुमको मेरी लाज” और दूसरा था “ठुमक ठुमक पग दुमक कुंज मधु” (इसे किसने लिखा मुझे आज तक नही पता, अगर किसी को ज्ञात हो तो बतायें प्लीज)। बचपन की अपनी समझ के हिसाब से हमको यही गीत ज्यादा पसंद आया इसलिये आज इसी के मार्फत श्रृद्धांजलि दे रहे हैं और दूसरा कारण है इस फिल्म का फिल्मांकन। ये गीत फिल्म के बैकग्राउंड में गाया गया है जब दीप्ति नवल जो गर्भवती थी उनको हास्पिटल ले जाया जाता है एक नये जीवन के आगमन के लिये। और हिन्दू धर्म में माना गया है कि आत्मा कभी नही मरती और हर बार नये शरीर धारण करती रहती है और ये भी एक कारण है।

पंडित जी के अन्य गायनों में जो मुझे अभी याद आ रहे हैं, उनमें हैं – “बीत गये दिन भजन बिना” (कबीर दास जी की लिखी रचना), “राम राम राम भजो राम भजो भाई“, “काहे करत मोसे बरजोरी“, “सावन की बुंदनिया” और “बोले ना वो हमसे पिया“। अब एक बार फिर सभी संगीत प्रेमियों की तरह उनके गाये गीतों को, उनके एलबम को हम भी टटोलेंगे। भले ही पंडित भीमसेन जोशी जी अब हमारे बीच नही है लेकिन उनके सुर और गायन हमेशा फिजां में गुंजयमान रहेगा हमारे बीच बजकर उनकी उपस्थिति दर्ज कराता रहेगा।

पंडित जी हमारी तरफ से और सभी संगीत प्रेमियों की तरफ से विनम्र श्रृद्धांजलि – सालों पहले ठुमक ठुमक पग धरते आया एक सुर आज ठुमक ठुमक पगों से वापस चला गया।

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

Leave a Reply 4,664 views |

शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें

Follow Discussion

One Response to “ठुमक ठुमक पग दुमक कुंज मधु (अनकही) – पंडित भीमसेन जोशी”

  1. अनूप शुक्ल Says:

    शास्त्रीय संगीत की मुझे बिल्कुल समझ नहीं है लेकिन पंडितजी का गाया हुआ गीत मिले सुर मेरा तुम्हारा जब सुना , बहुत अच्छा लगा।

    पंडित भीमसेन जोशी जी को विनम्र श्रद्धांजलि!

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर कुछ दिनों ही खुला रहता है। असुविधा के लिये हम से भूल हो रही है हमका माफी देयीदो, अच्छा कहो, चाहे बुरा कहो....हमको सब कबूल, हमका माफी देयीदो।