< Browse > Home / Golden Melody, Happy Go Lucky / Blog article: दिल ढूँढता है फिर वो ही फुरसत के रात दिन

| Mobile | RSS

दिल ढूँढता है फिर वो ही फुरसत के रात दिन

January 22nd, 2011 | 1 Comment | Posted in Golden Melody, Happy Go Lucky

दुनिया के इस कोने से उस कोने तक मौसम की ऊठापटक जारी है और ऐसे ही इस साल के जाड़ों में हर सप्ताह पड़ने वाली बर्फवारी के बीच एक सुबह की खिली खिली धूप ने याद दिलायी, इस गीत की – दिल ढूँढता, है फिर वो ही, फुरसत के रात दिन। इस गीत को सुनते सुनते याद आने लगी जाड़ों की नर्म धूप और …, इतना सब लिखकर, इस गीत को आज बार बार सुनते सुनते सोचा क्यों ना इस बेहतरीन गीत के बारे में भी दो चार बातें कर ली जायें।

संजीव कुमार और शर्मीला टैगोर के अभिनय से सजी फिल्म बचपन में उतनी पसंद नही आयी जितनी बड़े होकर देखने पर और यही इस फिल्म के लिखे गीतों के लिये भी कहूँगा। इस गीत को लिखा है गुलजार ने और इसके एक एक शब्द को सुनकर कुछ ना कुछ याद आ ही जाता है, चाहे अब वो जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेटना हो या जाड़ों की छुट्टियों के फुरसत के रात दिन। हाँ तब आँखों में खींच कर पड़ने वाले किसी के दामन के साये की कमी जरूर थी, हाँ वादियाँ थीं, सामने दिखती बर्फीली पहाड़ियाँ थी। गीत की खुबसूरती या कहूँ मधुरता में चार चाँद लगा दिये लताजी और भूपिन्दर की आवाज ने और इस जाड़े की नर्म धुप सा ही संगीत दिया था मदन मोहन साहेब ने।

दिल ढूँढता है फिर वही
फुरसत के रात दिन
बैठे रहे तसुव्वरे जाना किये हुए
दिल ढूँढता है फिर वही

जाड़ों की गर्म धूप और
आँगन में लेटकर
जाड़ों की नर्म धूप और
आँगन में लेटकर
आँखों पे खींच के तेरे दामने के साये को
आँखों पे खींच के तेरे दामने के साये को
ओंधे पड़े रहे कभी करवट लिये हुए
दिल ढूँढता ….

इस गीत में फुरसत ही फुरसत है चाहे वो जाड़ों की हो या गर्मियों की, जब छत पर रात को लेटे लेटे पुरवाई का मजा लेते लेते, तारे गिना करते थे और दिन में करवट बदलते हुए कॉमिक्स पढ़ते, या औंधे लेटे रहते। अब फुरसत के रात दिन ना सही इस गीत को सुनने के लिये मिलने वाला लम्हा ही काफी लगे। इससे ज्यादा क्या कहूँ, इस गीत को सुन लीजिये शायद आपको भी कोई जाड़ा या जाड़े की धूप या किसी आँचल का साया ही याद आ जाये। अब तो बस दिल ढूँढता है फिर वही फुरसत के रात दिन…

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

Leave a Reply 4,179 views |

शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें

Follow Discussion

One Response to “दिल ढूँढता है फिर वो ही फुरसत के रात दिन”

  1. nirmla.kapila Says:

    धन्यवाद इतना प्यारा गीत सुनवाने के लिये।

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर कुछ दिनों ही खुला रहता है। असुविधा के लिये हम से भूल हो रही है हमका माफी देयीदो, अच्छा कहो, चाहे बुरा कहो....हमको सब कबूल, हमका माफी देयीदो।