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दिल का दिया जला के गया

November 17th, 2010 | 4 Comments | Posted in Golden Melody

इस गीत का संगीत जितना मधुर है उतने ही मधुर इसके बोल है और वैसी ही खुबसूरती से इसे गाया गया है। १९६५ में एक फिल्म आयी थी आकाशदीप जिसे फणी मजूमदार ने निर्देशित किया था। धर्मेन्द्र, महमूद और नंदा के अभिनय से सजी इस फिल्म का संगीत दिया था चित्रगुप्त ने और गीत लिखे थे मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने।

इसी फिल्म का ये गीत दिल का दिया जला के गया, ये कौन मेरी तन्हाई में बहुत ही खुबसूरती के साथ गाया है लता मंगेशकर जी ने। इस गीत को सुन कर लगता है कितना फर्क है आज के और तब के संगीत में, उस संगीत के लिये लिखे जाने वाले गीतों में। अगर यकीन नही तो खुद सुनकर देखिये -

दिल का दिया जला के गया
ये कौन मेरी तन्हाई में,
सोये नग्में जाग उठे
होंठों की शहनाई में,
प्यार अरमानों का दर खटखाये
ख्वाब जागी आँखों से मिलने को आये
कितने सोये डोल पढ़े, सूनी सी अंगनाई में

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4 Responses to “दिल का दिया जला के गया”

  1. ram Says:

    बहुत बढ़िया गीत था ये!

  2. nirmla.kapila Says:

    बहुत सुन्दर ,मेरा मनपसंद गीत। धन्यवाद इसे सुनवाने के लिये।

  3. S.R.Ayyangar Says:

    This is of my liking too. A very soft melodious one. Thanks for sharing and this is my first visit to your blog. Of course now I have subscribed as I am fond of old songs.

  4. vijay Says:

    बहुत ही खूबसूरत …मेरा पसंदीदा गीत
    स्वागत के साथ vijayanama.blogspot.com

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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