तुम्हारा इश्क इश्क और हमारा इश्क बच्चा है जी
याद है वो एक पुराना विज्ञापन जो टीवी में आता था जिसमें एक महिला अपने पति को कहती थी, अब तो बड़े बन जाईये। याद है वो टाईम जब आप को कहा जाता था, ये जिद वगैरह छोड़ो अब तुम बच्चे नही हो, बड़े हो गये हो या फिर ये बच्चों जैसी हरकतें छोड़ो और ये सुनते सुनते हम आप कब बड़े हो गये (जाते हैं) पता ही नही चला (चलता)। अब गुलजार साहेब को शुक्रिया ये याद दिलाने के लिये चाहे कितनी परतों में सम्भाल के रख लो दिल तो बच्चा है जी।
मैं बात कर रहा हूँ फिल्म इश्किया की, देखा नाम ही कितना बचकाना है - सीधे सीधे इश्क की जगह पर कहा जा रहा है इश्किया। इस फिल्म में गीत लिखे हैं सदाबहार गुले गुलजार, गुलजार ने। अपने गीतों के लिये गुलजार साहेब जिस तरह से शब्द चुनते हैं फिर उन्हें पिरोते हैं उसका जवाब नही और इसी की एक ताजा मिसाल है - दिल तो बच्चा है जी। यही नही इसी फिल्म के लिये लिखा उनका दूसरा गीत - इब्न-ऐ-बतुता बगल में जूता, पहने तो करता है चुर्रररर भी उन्हीं के हस्ताक्षर बयाँन करता है।
गुलजार के गीत और विशाल भारद्वाज का संगीत मानो इस जमाने में एक दूसरे के पूरक हों। विशाल ने दोनों गीतों में लाजवाब संगीत दिया है। और सोने में सुहागे का काम किया इन दोनों गीतों का गाने वाले गायकों ने। जहाँ इब्न-ऐ-बतुता में सुखविन्दर और मीका ने रंग जमाया है वहीं दिल तो बच्चा है को खुबसूरती और सुफियाना अंदाज दिया है राहत फतेह अली खान की आवाज ने।
गीतों के बोलों पर जरा नजर दौड़ाइये, खासकर जवानी के जाने का और बुड़ापे के आने को बताने का क्या अंदाज है -
ऐसी उलझी नजर उन से हटती नही
दाँत से रेश्मी डोर कटती नही
उम्र कबके बरस के सुफेद हो गयी है
काली बदरी जवानी की छटती नही
वल्लाह ये धड़कन बड़ने लगी है
चेहरे की रंगत उड़ने लगी है
डर लगता है तन्हा सोने में जी
दिल तो बच्चा है जी
बाकि आप खुद सुनकर देख लीजिये मैं ऐंवैं ही नही कह रहा दिल वाकई में बच्चा है जी। अरे हाँ, ये तो कहना रह ही गया तुम्हारा इश्क इश्क और हमारा इश्क ?, फिल्म देखिये पता लग जायेगा
[both songs, infact album is a must for your collection and movie good to have in your film library]
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Comments
Thanks Tarun.
Vishal Bharadwaj’s music is soothing and Gulzar’s lyrics certainly attract attention.
Just this morning I read a post on the the other song and the influence of my favorite poet Sarveshwar Dayal Saxena ji.
http://hamkalaam.blogspot.com/2010/01/ibn-e-batuuta-bagal-men-juutaa.html













निश्चित ही देखेंगे यह फिल्म ! और गीत तो सचमुच लाजवाब हैं ।
आभार ।