सूरज जरा, आ पास आ, आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम

संगीत किसी भी गीत की मधुरता के लिये चार चाँद लगाने का काम करता है, किसी भी गीत के कर्णप्रिय या मधुर होने का ज्यादातर श्रेय या तो संगीतकार को चला जाता है या इसके गाने वाले को। उस गीत को लिखने वाले का नाम बहुत कम ही लिया या याद किया जाता है।

आज ये गीत सुन रहा था तो सबसे ज्यादा जिस बात ने मेरा ध्यान आकर्षित किया वो थे इस गीत के बोल, ऐसे शब्दों का मेल करा के इस गीत को लिखने के लिये जो कल्पना की उड़ान भरी है वो वाकई में काबिले तारीफ है। इस गीत को लिखा है शैलेन्द्र ने जिन्होंने ऐसे ना जिने कितने मधुर नग्में अपनी कलम से लिखे हैं।

इस तरह के गीत को गाने के लिये जो सबसे बेस्ट आवाज हो सकती है उसी ने इस गीत को आवाज दी है, जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ मन्ना दा की और संगीत दिया शंकर जयकिशन ने। ये गीत है शम्मी कपूर, राजकुमार और माला सिन्हा अभिनीत फिल्म उजाला से जो 1959 में रीलिज हुई थी। इस फिल्म के सभी गीत बहुत ज्यादा मधुर थे और शायद इस ‘सूरज जरा पास आ’ से ज्यादा प्रसिद्ध भी। और वो गीत थे/हैं - झूमता मौसम मस्त महीना, तेरा जलवा जिसने देखा, दुनिया वालों से दूर और अब कहाँ जायें हम। इस फिल्म के गीतों को लिखने वाले दूसरे गीतकार थे हसरत जयपुरी जिन्होंने औ मेरा नादान बालमा और झूमता मौसम मस्ता महीना ये दो गीत लिखे थे।

अगर आपने कभी ये गीत नही सुना है तो सुनके देखिये, इसमें आलू टमाटर, इमली की चटनी सभी का उपयोग किया गया है -

सूरज जरा, आ पास आ,
आज सपनों की रोटी पकायेंगे हम
है आसमाँ तू बड़ा मेहरबाँ
आज तूझको भी दावत खिलायेंगे हम

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