< Browse > Home / Gazals / Blog article: एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव

| Mobile | RSS

एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव

October 29th, 2009 | 4 Comments | Posted in Gazals

बहुत सालों पहले की बात है जब मैं छोटा था, जब सिर्फ दूरदर्शन होता था, जब टीवी प्रोग्राम सिर्फ कुछ घंटों के लिये आते थे। तब दो प्रोग्रामों के बीच में फिलर की तरह अलग अलग गायकों के गैर फिल्मी गीत और गजल बजते थे। उन्हीं में से एक थी राजेन्द्र मेहता और नीना मेहता की गायी ये गजल – एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव। ये तब भी अच्छी लगती थी और अब और भी ज्यादा अच्छी लगती है।

महानगरों में रहने वाले तो शायद ही इस गजल से कुछ रिलेट कर पायें लेकिन जो छोटे शहरों में या गाँवों में पहले रहे हों उनको शायद कुछ पुराने दिन याद आ जायें। यही नही अब तो उन छोटे शहरों में रहने वाले भी बजाय इस गीत के शायद जगजीत सिंह की इस गजल को गुनगुनाना ज्यादा पसंद करेंगे, “हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी, फिर भी तनहाईयों का शिकार आदमी।

खैर ये जाने दें और आप सुनिये -

एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव,
छोड़ कर गाँव को उस घनी छाँव को,
शहर के हो गये हैं, भीड़ में खो गये हैं।

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

Leave a Reply 3,263 views |

शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें

Follow Discussion

4 Responses to “एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव”

  1. vani geet Says:

    गाँव …पीपल सब याद आ गए …!!

  2. maya bhatt Says:

    मुझे भी बहुत याद आती है इंग्लैंड मे रहते हुए अपने घर की ,जहा मे खूब खेलती थी

  3. jabie husain Says:

    really very nice song i miss my village so…

  4. prahallad lenka Says:

    This song takes me to my childhood days. I feel nostalgic. i really miss the ambience of the vilage.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर कुछ दिनों ही खुला रहता है। असुविधा के लिये हम से भूल हो रही है हमका माफी देयीदो, अच्छा कहो, चाहे बुरा कहो....हमको सब कबूल, हमका माफी देयीदो।