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एक प्यारा सा गाँव, जिसमें पीपल की छाँव

बहुत सालों पहले की बात है जब मैं छोटा था, जब सिर्फ दूरदर्शन होता था, जब टीवी प्रोग्राम सिर्फ कुछ घंटों के लिये आते थे। तब दो प्रोग्रामों के बीच में फिलर की तरह अलग अलग गायकों के गैर फिल्मी गीत और गजल बजते थे। उन्हीं में से एक थी राजेन्द्र मेहता और नीना मेहता [...]

[ More ] October 29th, 2009 | 4 Comments | Posted in Gazals |