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सावन की रिमझिम में थिरक थिरक नाचे रे मन्ना दा

September 1st, 2009 | 1 Comment | Posted in Non Filmy

मन्ना डे के गाये जितने मधुर फिल्मी गीत होते हैं उतने ही मधुर होते हैं नॉन फिल्मी गीत, अगर मेरी बात का विश्वास नही तो हाथ कंगन को आरसी क्या खुद ही इस गीत को सुनकर डिसाइड कर लीजिये। ये गीत किसी भी एंगिल से नॉन फिल्मी नही लगता लेकिन हकीकत यही है कि है।

अगर आपको याद हो तो पहले दूरदर्शन के जमाने में ऐसे नॉन फिल्मी गीत दूरदर्शन में बहुत बजते थे और ज्यादातर फिलर का काम करते थे यानि दो प्रोग्रामों के बीच चलाये जाते थे। ऐसे ही कुछ नॉन फिल्मी गीतों में से एक दूसरा आज पेश है – सावन की रिमझिम में थिरक थिरक नाचे रे मयूरपंखी रे सपने

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One Response to “सावन की रिमझिम में थिरक थिरक नाचे रे मन्ना दा”

  1. nirmla.kapila Says:

    वाह बहुत सुन्दर गीत पहली बार सुना । लगता है दिन की शुरुआत अच्छी हुई धन्यवाद्

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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