मैं जहाँ रहूँ दिल को राहत देती राहत की आवाज

संगीत का जादू किस को मस्त नही कर देता लेकिन जब काम का बोझ ज्यादा हो और थकान उतारने के लिये संगीत सुना जाय तो ये मस्त नही करता बल्कि एक सुकून सा देता है। कम से कम मुझे तो ऐसा ही महसूस होता है, शाम से ही राहत फतेह अली खान को सुन रहा हूँ।

उसी कलेक्शन के एक गीत का आनंद आप भी लीजिये, राहत साहेब ने ये गीत फिल्म नमस्ते लंदन के लिये गाया है -

मैं जहाँ रहूँ, मैं कहीं भी हूँ तेरी याद साथ है।
किसी से कहूँ कि नही कहूँ, ये जो दिल की बात है
कहने को साथ अपने, एक दुनिया चलती है
पर चुपके इस दिल में तन्हाई पलती है
बस याद साथ है……

वरिष्ठ रंग-कर्मी हबीब तनवीर के इंतकाल का सुनकर दुख हुआ, साथ में कवि सम्मेलन को जा रहे कवियों के सड़क हादसे के बारे में सुना, ये सब सुनकर आनंद फिल्म की वो लाईने याद आ गयी - हम सब रंगमंच की कठपुतलियाँ हैं जिनकी डोर ऊपर वाले के हाथ में है जहाँपनाह। ये कब किसकी डोर खींच दे कुछ नही पता

हबीब तनवीर जी, आदित्य जी, नीरज पुरी जी, और लाड सिंह गुज्जर जी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि - तुम जहाँ रहो, तुम कहीं भी रहो, तुम्हारी याद साथ है

Share and Enjoy:
  • E-mail this story to a friend!
  • Google
  • del.icio.us
  • Technorati
  • Live
  • Facebook
  • MySpace
  • Digg
  • StumbleUpon
  • TwitThis
  • YahooMyWeb
Read in Your Language: Roman(Eng) | Gujarati | Bangla | Gurmukhi | Telugu
Tags: , and posted in Rahat Fateh Ali

शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें

Comments

आज ही ये गीत लोकल एफ एम पर सुना । मेरे घर में सभी को बेहद पसंद है और ये गीत मेरी वार्षिक संगीतमाला २००७ का हिस्सा था। इसे मैं हीमेश जी की बतौर संगीतकार अच्छी compositions में एक मानता हूँ।

एक साथ इतने लोगों को खोना पड़ा है. हमारी श्रद्धांजलि.

thanks for this nice song Tarun,hindi me likhna sikhaye pls

ये गीत वाकई में बहुत अच्छा बन पडा है. कॄष्णा नें हमेशा हिमेश के लिये घोस्ट वाईसिंग की है, , तो यहां अच्छा सिला मिला है.

thanks for this song tarun .yeah song wakai dil ko chu jata hai.dil karta hai bas aankh band karke sunti rahu.it’s very nice song.

Leave a comment

(required)

(required)