< Browse > Home / Classical / Blog article: अलबेली नार प्रीतम द्वार खड़ी – मन्ना डे की आवाज में

| Mobile | RSS

अलबेली नार प्रीतम द्वार खड़ी – मन्ना डे की आवाज में

May 1st, 2009 | 6 Comments | Posted in Classical

1962 में रीलिज जिस फिल्म का ये गीत है वो तो मैं अब कह नही सकता लेकिन आप में से बहुत होंगे जिनके पास अभी भी ये मौका है कि वो कहें – मैं शादी करने चला। जी हाँ इसी फिल्म का ये गीत है, अलबेली नार प्रीतम द्वार खड़ी, आवाज है वन एंड ओनली मन्ना दा (Manna Dey) की।

संगीत है चित्रगुप्त (Chitragupt) का और इस गीत को लिखा है मजरूह सुल्तान पुरी (Majrooh Sultanpuri) ने। इस फिल्म में फिरोज खान और मुमताज की मुख्य भूमिका थी, अभी लिखते लिखते ध्यान आया कि कुछ दिनों पहले फिरोज खान (Firoz Khan) के दिवंगत होने की खबर पड़ी थी। इसलिये ये गीत फिरोज खान को श्रृद्धासुमन के रूप में अर्पित है।

अलबेली नार प्रीतम द्वारे -२
खड़ी घुंघट खोले
खड़ी घुंघट खोले
रस अंखियों में घोले
मुस्कान भरे चुपके-चुपके वो निहारे
अलबेली नार प्रीतम द्वारे

नैना झुके झुके मस्ती में झूले
और उठे तो जिया तक छुलें
नैना झुके झुके मस्ती में
नैना झुके झुके मस्ती में झूले
नैना झुके झुके मस्ती में मस्ती में मस्ती में
नैना झुके झुके मस्ती में झूले
और उठे तो जिया तक छुलें
देखो रे देखो कोई सांवरी
कैसा जादू करे चुपके चुपके वो निहारे
अलबेली नार प्रीतम द्वारे

लागे ऐसे में अजब मतवारी
हिरनी जैसे हो प्यास की मारी
लागे ऐसे में अजब मतवारी
हिरनी जैसे हो प्यास की मारी
देखो तो ऐसी लागे बावरी
जैसे प्यार करे चुपके चुपके वो निहारे
अलबेली नार प्रीतम द्वारे

अलबेली नार प्रीतम द्वारे -२
खड़ी घुंघट खोले
खड़ी घुंघट खोले
रस अंखियों में घोले
मुस्कान भरे चुपके-चुपके वो निहारे
अलबेली नार प्रीतम द्वारे

अब इस गीत का सुनकर मजा लीजियेः

Audio clip: Adobe Flash Player (version 9 or above) is required to play this audio clip. Download the latest version here. You also need to have JavaScript enabled in your browser.

Leave a Reply 3,286 views |

शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें

Follow Discussion

6 Responses to “अलबेली नार प्रीतम द्वार खड़ी – मन्ना डे की आवाज में”

  1. समीर लाल Says:

    आनन्द आ गया.आभार.

  2. rekhaprahalad Says:

    Black and white era के भूले बिसरे गीतों का लुत्फ़ ही कुछ और है, शब्दों में बयां नही कर सकते। महसूस कर सकतें है क्योंकि ये रूह को छू जातें है। इसी तरह के गीत सुनते रहिये।

  3. manish Says:

    hallo

  4. manish Says:

    अलबेली नार प्रीतम द्वारे -२
    खड़ी घुंघट खोले
    खड़ी घुंघट खोले
    रस अंखियों में घोले
    मुस्कान भरे चुपके-चुपके वो निहारे
    अलबेली नार प्रीतम द्वारे

    नैना झुके झुके मस्ती में झूले
    और उठे तो जिया तक छुलें
    नैना झुके झुके मस्ती में
    नैना झुके झुके मस्ती में झूले
    नैना झुके झुके मस्ती में मस्ती में मस्ती में
    नैना झुके झुके मस्ती में झूले
    और उठे तो जिया तक छुलें
    देखो रे देखो कोई सांवरी
    कैसा जादू करे चुपके चुपके वो निहारे
    अलबेली नार प्रीतम द्वारे

    लागे ऐसे में अजब मतवारी
    हिरनी जैसे हो प्यास की मारी
    लागे ऐसे में अजब मतवारी
    हिरनी जैसे हो प्यास की मारी
    देखो तो ऐसी लागे बावरी
    जैसे प्यार करे चुपके चुपके वो निहारे
    अलबेली नार प्रीतम द्वारे

    अलबेली नार प्रीतम द्वारे -२
    खड़ी घुंघट खोले
    खड़ी घुंघट खोले
    रस अंखियों में घोले
    मुस्कान भरे चुपके-चुपके वो निहारे
    अलबेली नार प्रीतम द्वारे

  5. Pushpa Gupta Says:

    Please also send the SARGAM portion. Thanks, PG

  6. Dilip Bhatt, usa Says:

    Sir,
    Keep it. Very good, I like and love those song

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर कुछ दिनों ही खुला रहता है। असुविधा के लिये हम से भूल हो रही है हमका माफी देयीदो, अच्छा कहो, चाहे बुरा कहो....हमको सब कबूल, हमका माफी देयीदो।