माँ पर एक खुबसूरत गीतः उसको नही देखा हमने कभी
माँ पर लिखी कविताओं की चर्चा पढ़ते हुए माँ पर मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत “उसको नही देखा हमने कभी, पर इसकी जरूरत क्या होगी, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी“, मुझे स्ट्राईक किया। जब मैं छोटा था तो ये गीत विविध भारती पर खूब बजता था। उस वक्त गीत के बोलों और भाव से ज्यादा घोड़ों के टापूओं (खुरों) की “टक टक” की आवाज ज्यादा अच्छी लगती थी, फिर धीरे धीरे उम्र बढ़ी और “टक टक” की आवाज दूर होती गयी और उसकी जगह माँ के प्रति प्यार के भावों ने ले ली।
आज फिर याद आने पर आफिस से आते ही अपना कलेक्शन खंगाला गया और आखिर मिल ही गया ये गीत। इस गीत को 1966 में रीलिज हुई फिल्म “दादी माँ” के लिये मन्ना दा और महेन्द्र कपूर ने गाया था और संगीत दिया था रोशन ने।
फिल्म में मुख्य भूमिका में थे अशोक कुमार, माँ का किरदार किया था बीना रॉय ने, दादी माँ बनी थी दुर्गा खोटे। ये गीत फिल्माया गया था बीना रॉय, दिलीप राज और काशीनाथ के ऊपर।
आज मेरी तरफ से दुनिया की सभी माँओं को ये गीत समर्पित है -
उसको नहीं देखा हम ने कभी
पर इसकी ज़रूरत क्या होगी
ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी, क्या होगी
उसको नहीं देखा हम ने कभी…इंसान तो क्या देवता भी
आँचल में पले तेरे
है स्वर्ग इसी दुनिया में
कदमों के तले तेरे
ममता ही लुटाये जिसके नयन ओ ओ…
ममता ही लुटाये जिसके नयन
ऐसी कोई मूरत क्या होगी
ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी, क्या होगी
उसको नहीं देखा हम ने कभी…क्यूँ धुप जलाये दुखो की
क्यूँ ग़म की घटा बरसे
ये हाथ दुआओं वाले
रहते हैं सदा सर पे
तू है तो अंधेरे पथ में हमें ओ ओ..
तू है तो अंधेरे पथ में हमें
सूरज की ज़रूरत क्या होगी
ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी, क्या होगी
उसको नहीं देखा हम ने कभी…कहते हैं तेरी शान में जो
कोई ऊँचे बोल नहीं
भगवान के पास भी माता
तेरे प्यार का मोल नहीं
हम तो ये ही जाने तुझ से बड़ी ओ ओ..
हम तो ये ही जाने तुझ से बड़ी
संसार की दौलत क्या होगी
ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी, क्या होगी
उसको नहीं देखा हम ने कभी…पर इसकी ज़रूरत क्या होगी
ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी, क्या होगी
उसको नहीं देखा हम ने कभी…
इस पोस्ट का फिलहाल अंत कुंवर बेचैन जी की लिखी इन चंद लाइनों के साथ -
अभी उफनती हुई नदी हो,
अभी नदी का उतार हो माँ,
रहो किसी भी दशा-दिशा में,
तुम अपने बच्चों का प्यार हो माँ।
नरम सी बाहों में खुद झुलाया,
सुना के लोरी हमें सुलाया ,
जो नींद भर कर कभी न सोई,
जनम-जनम की जगार हो माँ।
शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें
Comments
माँ की याद आगई। सुंदर गीत सुनाने के लिए धन्यवाद। Your blog is a real treasure trove of information. Thanks for dropping in to this side of horizon.
mujhe bhi bahut zyada pasand hai ye geet…itni aatmeeyta liye ye gaana hai,itni saari bhaavnaaye…
vaise vividh bharti pe ab bhi kaafi aata hai ye gaana
I am really thankful to the composer of this songs. Thanks a lot….
Man Tumhari jai ho.
Himanshu Kumar Pant
Whenever I listen this song, I really miss those moments when I was with my “MAA”.I think this songs cover a lot about MAA. I can say a big thanks to the composer of this songs. I will try to spread this songs to all the person who still forget the post of MAA in life.
Himanshu Kumar Pant
eWebGuru.com
Dear Tarunji,
AAp ki pasandgi ne hame ruladiya.Vakay hi Maa ki kami koi puri nahi kar sakta.Us devi ke charno main swarg hota hai yeh baat aaj ke nav yuvanoko kaun samzayega.
Thank you for making this song available for listening.
Aap ka dost - Rohit.
Thanks for the beautiful song…. Internet se download karna chah rahi thi….. how I Can do that…. I could not find it on any song download site….Please bataiyega… if possible













ये तो मेरा बेहद पसंददीदा गीत है ये तरुण जी,
वाकई मां के बाद किसी भी अन्य काल्पनिक सहारे की जरूरत नहीं होती