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चंदन दास की आवाज में सुनियेः मैंने मुँह को कफन में छुपा जब लिया

March 23rd, 2009 | 7 Comments | Posted in Gazals

आप में से अगर किसी को दूरदर्शन के जमाने की याद हो तो ये भी याद होगा कि उसमें अक्सर गाहे-बगाहे एक शख्स की महफिल जमती थी या कह लीजिये उसके गीत और गजल बजते थे। जी हाँ, सही पहचाना मैं चंदन दास की बात कर रहा हूँ। गीतों के अंदाज में गायी उनकी गजलें आसानी से हर किसी को पसंद आ जाती है, संगीत तो साधारण होता था लेकिन गजलों का सलेक्शन था जो वास्तव में पसंद आता था।

ऐसी ही एक गीत-गजल आज पहली बार सुनी (अगर पहले सुनी हो तो याद है), अंतिम अंतरे को ध्यान से सुनियेगा।

मैंने मुँह को कफन में छुपा जब लिया
तब उन्हें मुझ से मिलने की फुरसत मिली
हाले दिल पूछने जब वो घर से चले
रास्ते में उन्हें मेरी मय्यत मिली

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7 Responses to “चंदन दास की आवाज में सुनियेः मैंने मुँह को कफन में छुपा जब लिया”

  1. seema gupta Says:

    मैंने मुँह को कफन में छुपा जब लिया
    तब उन्हें मुझ से मिलने की फुरसत मिली
    ” बहुत सुंदर ग़ज़ल पहले भी सुनी थी और आज फिर से सुन कर याद ताजा हो आई…”

    Regards

  2. mahesh baurai Says:

    purani yadain fir se taja ho gayee

  3. Chandra Mohan Gupta Says:

    गीतों के अंदाज में गायी गजलें ………….. यही तो अंदाजे बयां है, जो खूबसूरत को और भी खूबसूरत बना देता है.

    पुरानी यादें ताज़ा करा कर मन प्रसन्न कर दिया………….

    आभार स्वीकारें.

    चन्द्र मोहन गुप्त

  4. Dileepraaj Nagpal Says:

    Yaaden Taza Kar Di aapne. Gazhalen Rooh Ko Choo Jati Hain…

  5. ravish Says:

    too good

  6. MANVEER Says:

    KYA BAAT HAI.
    LAKER HASEEN SHAAM TERI YAD AA GAYEE.

    JAB BHEE KISEE GAZAL NE MUHABBAT KE SAAJ PE
    CHADI GAZAL PYAM TERI YAD AAGAYEE.

    LAKER HSEEN SHAAM TERI YAD AA GAYEE

  7. shashi bala Says:

    maine muh ko kafan me chupa jab liya, tab unko milne ki fursat mili. maine yeh song pahli baar suni.wakai it’s tuch my heart.thanks for this song.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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