चंदन दास की आवाज में सुनियेः मैंने मुँह को कफन में छुपा जब लिया

आप में से अगर किसी को दूरदर्शन के जमाने की याद हो तो ये भी याद होगा कि उसमें अक्सर गाहे-बगाहे एक शख्स की महफिल जमती थी या कह लीजिये उसके गीत और गजल बजते थे। जी हाँ, सही पहचाना मैं चंदन दास की बात कर रहा हूँ। गीतों के अंदाज में गायी उनकी गजलें आसानी से हर किसी को पसंद आ जाती है, संगीत तो साधारण होता था लेकिन गजलों का सलेक्शन था जो वास्तव में पसंद आता था।

ऐसी ही एक गीत-गजल आज पहली बार सुनी (अगर पहले सुनी हो तो याद है), अंतिम अंतरे को ध्यान से सुनियेगा।

मैंने मुँह को कफन में छुपा जब लिया
तब उन्हें मुझ से मिलने की फुरसत मिली
हाले दिल पूछने जब वो घर से चले
रास्ते में उन्हें मेरी मय्यत मिली

Share and Enjoy:
  • E-mail this story to a friend!
  • Google
  • del.icio.us
  • Technorati
  • Live
  • Facebook
  • MySpace
  • Digg
  • StumbleUpon
  • TwitThis
  • YahooMyWeb
Read in Your Language: Roman(Eng) | Gujarati | Bangla | Gurmukhi | Telugu
Tags: , and posted in Gazals

शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें

Comments

मैंने मुँह को कफन में छुपा जब लिया
तब उन्हें मुझ से मिलने की फुरसत मिली
” बहुत सुंदर ग़ज़ल पहले भी सुनी थी और आज फिर से सुन कर याद ताजा हो आई…”

Regards

purani yadain fir se taja ho gayee

गीतों के अंदाज में गायी गजलें ………….. यही तो अंदाजे बयां है, जो खूबसूरत को और भी खूबसूरत बना देता है.

पुरानी यादें ताज़ा करा कर मन प्रसन्न कर दिया………….

आभार स्वीकारें.

चन्द्र मोहन गुप्त

Yaaden Taza Kar Di aapne. Gazhalen Rooh Ko Choo Jati Hain…

too good

KYA BAAT HAI.
LAKER HASEEN SHAAM TERI YAD AA GAYEE.

JAB BHEE KISEE GAZAL NE MUHABBAT KE SAAJ PE
CHADI GAZAL PYAM TERI YAD AAGAYEE.

LAKER HSEEN SHAAM TERI YAD AA GAYEE

maine muh ko kafan me chupa jab liya, tab unko milne ki fursat mili. maine yeh song pahli baar suni.wakai it’s tuch my heart.thanks for this song.

Leave a comment

(required)

(required)