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दिल विल ६: धानी चुनरी पहन सज के बन के दुल्हन

February 7th, 2009 | 6 Comments | Posted in For Your Valentine, Romantic

अभी तक मैं ६ विवाह के प्रकार बता चुका हूँ, आज बाकि बचे हुए दो विवाहों के बारे में बताता हूँ। ये दोनों प्रकार के विवाह समाज में अपराध के रूप में आते हैं।

राक्षसा विवाह (Rakshasa Marriage), ये बल-पूर्वक किया गया विवाह होता था, इसमें लड़की को उसके घर से बल पूर्वक उठा ले जाकर उसकी इच्छा के विरूद्ध जबरदस्ती विवाह किया जाता था।

पिचासा विवाह (Paishacha Marriage), मुझे लगता है ये वो ही है जिसे हम आज बलात्कार कहते हैं। जब कोई युवक उस लड़की के साथ शादी करता है जिसे वो नींद में सोये हुए में या नशे की हालत में या किसी पागलपन में बहकाता फुसलाता (seduced) है।

ये थे प्राचीन भारत के आठ प्रकार के विवाह, जिनमें से कई आजकल अवैध हैं।

और अब एक गीत: ये कोई विवाह गीत तो नही लेकिन ये उस लड़की के दिल की आवाज है जो विवाह बाद अपना घर छोड़ साजन के घर जाने लगती है। ये गीत १९६७ में बिनाका गीत माला में साल का सरताज गीत था।

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किशोर साहू के निर्देशन में सन् 1967 में फिल्म आयी थी “हरे कांच की चुड़ियाँ”, जिसमें संगीत दिया था जयकिशन दयाभाई पंचाल (Jaykishan Dahyabhai Panchal) और शंकरसिन रघुवंशी जिन्हें हम शंकर-जयकिशन की जोड़ी के नाम से जानते हैं। इसी फिल्म से है ये गीत धानी चुनरी पहन सज के बन के दुल्हन जिसे आशा भोंसले ने गाया है और लिखा था हसरत जयपुरी ने।

फिल्म में मुख्य भूमिका थी बिश्वजीत, नैना साहू और हेलन की। आशा और मो रफी का गाया हुआ इस फिल्म का एक और बहुत मधुर गीत हैं – पंछी रे ओ पंछी, जिसे फिर कभी।

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6 Responses to “दिल विल ६: धानी चुनरी पहन सज के बन के दुल्हन”

  1. Dr.Arvind Mishra Says:

    सचमुच जोरदार !

  2. Gagan Sharma Says:

    स्वागत है आपका।
    यह टिप्पणी शिकायत नहीं है क्योंकि अनगिनत ब्लाग हैं, देखना-पढ़ना मुश्किल है। वैसे यही विषय 18 दिसम्बर को ‘कुछ अलग सा’ पर आ चुका है।
    अन्यथा ना लें। it is just an information

  3. alpana Says:

    rochak jaankari.
    movie ki actress ‘naina sahu’ ka naam nahin maluum tha.aur shankar jaikishan ka poora naam bhi maluum hua.
    dhnywaad

  4. Harshad Jangla Says:

    Good article.
    A correction: Jaykishan Dahyabhai Panchal is the real name.
    His wife was Pallavi.
    He used to visit a hotel “Gaylord” at Churchgate, Mumbai very regularly and used to smoke 555 brand cigarette.
    He had a reserve table whenever he visited the hotel.
    When he passd away, the owner of the hotel kept his photograph on that table with a pack of 555 on that table
    for 10 days and did not allow anyone to sit on that table during those days.
    -Harshad Jangla
    Atlanta, USA

  5. Tarun Says:

    @हरशदजी, करेक्शन के लिये और अन्य तमाम जानकारी देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद।

  6. Murtaza Says:

    Yeh geet Shailendra Saheb ne likha na ki Hasrat Jaipuri Saheb ne.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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