एक चमेली के मंडवे तले, दो बदन प्यार की आग में जल गये

आज वी-डे के उपलक्ष्य में ये गीत सुनिये दो बिल्कुल जुदा अंदाज और संगीत के साथ, एक में फिल्मी गीत वाला अंदाज है तो दूसरे में गजल का। फर्क बस संगीत और गायकी का है, गीत के बोल और भाव वही हैं।

“एक चमेली के मंडवे तले, दो बदन प्यार की आग में जल गये”, इस गीत को लिखा था मखदूम मोइउद्दीन ने। जिसे सबसे पहले 1964 में गाया गया और उसके बाद 1992 में।

1992 में जगजीत सिंह की गजल का एक एलबम आया था कहकशाँ (Kahkashan), उसी के लिये उन्होंने ये गीत (गजल) गाया था लेकिन ये गीत सबसे पहले मो. रफी और आशा भोंसले ने गाया था, 1964 में रीलिज हुई फिल्म “चा चा चा (Cha Cha Cha)” के लिये, जिसका संगीत दिया था इकबाल कुरैशी ने। फिल्म के मुख्य कलाकार थे चंद्रशेखर और हेलन, उन्हीं के ऊपर ये गीत फिल्माया भी गया था।

एक चमेली के मंडवे तले,
मयकदे से जरा दूर उस मोड़ पर
दो बदन प्यार की आग में जल गये

प्यार हर्फ-ए-वफा
प्यार उन का खुदा
प्यार उनकी चिता
दो बदन प्यार की आग में जल गये

ओस में भीगते
चाँदनी में नहाते हुए
जैसे दो ताजा रूह
ताजा दम फूल पिछले पहर
ठंडी ठंडी सबब-ओ-चमन की हवा
सर्फ़े-मातम हुई - ३
काली काली लटों से लिपट
गरम रूखसार पे
एक पल के लिये रूक गयी
दो बदन प्यार की आग में जल गये

हमने देखा उन्हें
दिन में और रात में
नूर-ओ-जुल्मात में
दो बदन प्यार की आग में जल गये

मस्जिदों की मीनारों ने देखा उन्हें
मंदिरों के किवाड़ों ने देखा उन्हें
मयकदे की दरारों ने देखा उन्हें
दो बदन प्यार की आग में जल गये

अज़ अज़ल ता अबद
ये बता चारागर
तेरी जंबील में
नुस्खा-ऐ-कीमिया-ऐ-मुहब्बत भी है
कुछ इलाजो-मुदावा-ऐ-उल्फ़त भी है
दो बदन प्यार की आग में जल गये

सबसे पहले फिल्म का गीत सुनिये रफी और आशा के स्वर में: इस गीत में अंतिम पैरा नही गाया गया है

अब यही गीत सुनिये जगजीत सिंह के चिरपरिचित अंदाज में: इसमें दूसरा पैरा, ओस की बूँद वाला नही गाया गया है

इसमें अंतिम पैराग्राफ के बोलों के मतलब अपनी समझ में नही आये, किसी को पता हो तो जरूर बतायें - हैप्पी वैलेंटाईन डे

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Comments

सब से पहले तो इस गीत को फिर से सुनवाने के लिए शुक्रिया. दिन बना दिया आप ने … Valentine’s Day को “अज़ अजल ता अबद मुहब्बत” की बात करने वाले इस गीत से बेह्तर हो सकता है ?

आखिरी बंद को कुछ यूँ समझें ?

अज़ अजल = वह समय जिसकी शुरुआत न हो, तब से / अनादिकाल से
ता अबद = व समय जिस का अंत ज्ञात न हो, तब तक / हमेशा के लिए
चारःगर = चिकित्सक
तेरी जंबील में = तेरी झोली / पिटारी में
नुस्खा-ए-कीमिया-ए-मुहब्बत = मुहब्बत की Chemistry का नुस्खा / तरीका
मुदावा = इलाज (प्यार का कोई इलाज भी है ?)

मस्जिदों की मीनारों ने देखा उन्हें
मंदिरों के किवाड़ों ने देखा उन्हें
मयकदे की दरारों ने देखा उन्हें
दो बदन प्यार की आग में जल गये
“वाह समय की डिमांड और मौके की नजाकत के अनुसार इतने सुंदर गीत की प्रस्तुती लिए बहुत बहुत आभार…..
हैप्पी वेलेंटाईन डे”

Regards

Regards

bahut khoob.

Is post ki email aaj hi mili.

yah to kal ki tarikh mein post hui hai..

koi baat nahin dono hi geet behda khubsurat hain.

Jagjeet singh ji ki gayi ghazal mein bilkul alag andaj laga..
pyar harfey wafa…..pyra unka khuda!!!!!

kya umda wording hain!
shukriya..

तरुण भाई,
हम प्यार में जलने वालों के लिए तो रोज़ valentine होता है, रोज़ वसंतोत्सव होता है. ये गीत काफ़ी अरसे बाद सुना. दरअसल भूल ही चुका था इसे. ऐसी नज़्म की कम्पोजीशन बेहद मुश्किल काम है और उसपर उसे गा पाना और भी मुश्किल.

कुछ करेक्शन करने की ज़हमत कर रहा हूँ.
ताज़ा-रौ - नया खिला हुआ
सुबुक रौ - धीरे धीरे चलने वाली
सर्फ़े-मातम - शोक में व्यतीत

और आखरी बंद कुछ यूँ है:
अज़ अज़ल ता अबद
ये बता चारागर
तेरी जंबील में
नुस्खा-ऐ-कीमिया-ऐ-मुहब्बत भी है?
कुछ इलाजो-मुदावा-ऐ-उल्फ़त भी है?

अज़ अज़ल - आदि से
ता अबद - अंत तक
जंबील - झोली
नुस्खा-ऐ-कीमिया-ऐ-मुहब्बत - इश्क को सोना बनाने का नुस्खा

@मीत और महेन भाई,
शब्दार्थ बताने और उन्हें ठीक करवाने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद, आशा है आप हमेशा आते रहेंगे और ऐसे ही मार्गदर्शन करते रहेंगे।

सही बात है, हम प्यार में जलने वालों के लिये लिये सब दिन एक समान

@अल्पना, और सीमा :)

@ईष्टदेव, आपको धन्यवाद आशा है आप आते रहेंगे।

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