एक नजरः म्यूजिक एलबम देहली ६ (साथ में सुनिये ससुराल गेंदा फूल)

देहली ६ का म्यूजिक एलबम ए आर रहमान, रजत ढोलकिया और प्रसून जोशी की एक मधुर और संगीतमय प्रस्तुति है जो शास्त्रीय, आधुनिक रॉक और लोक संगीत की त्रिवेणी का मजा देती है। रहमान की देहली ६ का संगीत, स्लमडॉग से कहीं बेहतर लगा मुझे। यही नही इस एलबम के गीतकार प्रसून जोशी निसंदेह मुझे गुलजार की लीग के गीतकार लगते हैं जो गीतों में नये-नये शब्दों को बहुत ही सुन्दरता से प्रयोग करते हैं। देहली ६ के गीतों के बोलों को ध्यान से सुनियेगा आप भी मानेंगे कि गुलजार सागा को आगे बढ़ाने में वो ही सबसे बेहतर उम्मीदवार हैं।

जहाँ भोर भयी, शास्त्रीय संगीतमय प्रस्तुति है जिसे बहुत ही मधुरता के साथ गाया है उस्ताद बड़े गुलाम अली खान साहब, श्रेया घोषाल और गुजरी तोढी ने। वहीं उसके बाद आता भरपूर मस्ती में मोहित चौहान का गाया गीत मसक्कली (इसका मतलब किसी को पता हो तो बतायें)। इस गीत के बोलों पर जरा नजर डालिये गीतों के ट्रेडिशनल बोलों से कितने जुदा हैं -

ऐ मसक्कली, मसक्कली,
उड़ मटक कली मटक कली - 2
जरा पंख झटक, गयी धूल अटक
और लचक मचक के दूर भटक
उड़ डगर डगर कस्बे कूचे नूँ

अमिताभ बच्चन की आवाज में नूर एक गीत नही बल्कि चार लाईना कविता है जिसमें छूपे भावों को अमिताभ की आवाज ने उभरने में खूब मदद की है -

जर्रे जर्रे में उसी का नूर है
झांक खुद में, वो ना तूझसे दूर है
इश्क है उझसे, तो सबसे इश्क कर
इस इबादत का यही दस्तूर है
इसमें उसमें और उसमें है वो ही
यार मेरा हर तरफ भरपूर है

फिर आता है, एक आरती “तुमरे भवन में” जिसे गाया है रेखा भारद्वाज, किशोरी ग्वारिकर, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजुमदार ने। श्लोक और कुछ लोक गीत की मिश्रित स्टाईयल में इसे गाया है जो मसक्कली के बाद कानों में ठंडक सी डालता है।

लोक गीतों (छत्तीसगढ़ी या राजस्थानी) का ये संगीत और स्टाईयल और मुखर हो उठता है ससुराल गेंदा फूल में, जिसके बोलों में भी लोक गीतों की महक आती है। जो शुरू तो लोक गीतों की तरह होता है लेकिन फिर आ जाती है फंकी टाईप बीट्स, इसे सुनकर लगता है इस गीत को रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजुमदार से बेहतर शायद ही कोई गा सकता। देहली ६ का यही गीत मैने सबसे पहले सुना और सुनते ही लग गया कि देहली ६ के गीत-संगीत में काफी दम होगा, सुनकर यही साबित हुआ भी।

ओय होय ओय होय-४
सैंया छेड़ देवें, ननद चुटकी लेवे
ससुराल गेंदा फूल
सास गारी देवे, देवर समझा लेवे
ससुराल गेंदा फूल
छोड़ा बाबुल का अंगना, भावे डेरा पिया का हो
सास गारी देवे, देवर समझा लेवे
ससुराल गेंदा फूल
सैंया है व्यापारी, चले हैं परदेश
सुरतिया निहारूँ जियरा भारी होवे
ससुराल गेंदा फूल

फिर है एक स्लो प्रस्तुति “दिल मेरा दफतन” जिसे गाया है ऐश किंग और बेकिंग चिनमय ने, गाना एलबम का सबसे स्लो गीत है लेकिन बोलों में इसके भी काफी दम है। इस एलबम में रहमान ने काफी अलग अलग और नये गायकों का प्रयोग बहुत ही कुशलता से किया है।

संगीत के इस धीमेपन को तोड़ने अचानक आ जाता है “हे काला बंदर“, कार्तिक, नरेश, श्रीनिवास और बोनी चक्रवर्ती की आवाज में, इन लोगों ने इसे भरपूर मस्ती से तो गाया है ही लेकिन इसके बीट्स भी काफी फास्ट हैं। ये गीत हिन्दी और अंग्रेजी में मिक्स है और इसे सुनकर याद आती है फिल्म साथियाँ के एक गीत से। इस गीत में शब्दों का प्रयोग देखिये -

कस्में तो मुँगफली है
जब जी चाहे हम खाते
ऊपर से ना ना ना करते
और थाली आगे सरकाते
एक थैली के चट्टे बट्टे
अरमाँ है हट्टे कट्टे

फिर इस तेजी को ब्रेक लगाने खुद रहमान आ उठते हैं बेनी दयाल और तन्वी के साथ “रहना तू” गाने, रहमान के गाये अन्य गीतों का चिर परिचित अंदाज इसमें साफ झलकता है। इस गीत में बांसुरी का प्रयोग भी सुनायी पड़ता है।

हाथ थाम चलना है तो दोनों के दायें हाथ संग कैसे - २
एक दायाँ होगा एक बायाँ होगा
थाम लो हाथ ये थाम लो
चलना है संग थाम लो
रहना तू…

देहली 6 टाइटिल गीत है ब्लाजी, बेनी दयाल, विविनेनी पोचा, तन्वी और क्लेअर की आवाज में। ओल्डी गोल्डी ये है मुम्बई मेरी जान की तर्ज में ही संगीत की आधुनिकता का जामा पहना ये गीत है जो दिल्ली दिल वालों की है इस स्लोगन को पुख्ता करता हुआ है। ये भी हिन्दी और अंग्रेजी मिश्रित शब्दों में लिखा गया है।

ये दिल्ली है मेरे यार
बस इश्क मोहब्बत मेरे यार
बस्ती है मस्तानों की दिल्ली, दिल्ली
गली है दिवानों की दिल्ली सच

इस एलबम का दसवाँ और अन्तिम गीत है अर्जियाँ जिसे जावेद अली और कैलास खेर ने गाया है। कैलास के नाम से ही लग जाता है ये सूफियाना अंदाज का गीत होगा। गीत, कव्वाली और सूफियाने का मिश्रण है अर्जियाँ जिसमें एक बार फिर मेरे मौला को याद किया गया है। पिछले कई समय से “मेरे मौला” गीतकारों के फेवरिट बने हुए हैं, तारीफ ये है कि तीनों ही गीत खूब सराहे गये, आमीर और दोस्ताना के बाद ये भी मेरे मौला की मलंगता की बेजोड़ प्रस्तुति है।

अर्जियाँ सारी मैं
चेहरे पर लिख कर लाया हूँ
तुम से क्या माँगू मैं
तुम खुद ही समझ लो
या मौला
मौला मौला मौला मेरे मौला

जो भी तेरे दर आया
झुकने जो सर आया
मस्तियाँ पिये सबको झुमता नजर आया
प्यास लेकर आया था दरिया वो भर लाया
नूर की बारिश में भीगता सा तर आया
मौला मौला मौला मेरे मौला

कुल मिलाकर संगीत की लाइब्रेरी के कलेक्शन के लिये ‘देहली ६’ है Must Buy। इसमें पुराने, नये, हर तरह के संगीत को पसंद करने वाले के लिये कुछ ना कुछ है। रहमान और प्रसून की जुगलबंदी की एक ओर बेहतरीन प्रस्तुति है देहली 6 (one of Rahman´s greatest soundtracks)। इस एलबम के सभी गीतों की एक छोटी सी झलक (ये सभी गीत ऊपर लिखे गये क्रम में ही हैं) -

इसके बाद सुनिये वो गीत जिसकी वजह से ही मैने देहली 6 को पूरा सुना। रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजुमदार की आवाज में छत्तीसगढ‌ी लोकगीत की मधुरता लिये हुए ‘ससुराल गेंदा फूल‘ -

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Comments

bahut hi bdiya

is nayee album ki bahut hi achchee sameeksha ki hai.

very nice.

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