दिल विल ५: छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा कि जैसे मंदिर में लौ दिये की
कल हमने तीन तरह के विवाहों की बात की थी, आज उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हैं और कुछ अन्य तरह के विवाहों पर नजर डालते हैं।
प्रजापत्या विवाह (Prajapatya Marriage), इसमें लड़की का पिता लड़की और लड़के को आशीर्वाद देकर विदा करता है - आप दोनों अपने कर्तव्य का निर्वाह एक साथ करें।
गंधर्व विवाह (Gandharva Marriage), यानि भागकर किया गया विवाह। इसमें लड़की और लड़का माँ-बाप से छुपकर विवाह रचाते हैं।
असुरा विवाह (Asura Marriage), जैसा कि नाम से ही विदित होता है, इसमें लड़का बहुत ज्यादा रूपये पैसे देकर लड़की ब्याह करके लाता है। ऐसे विवाह या तो बेमेल होते हैं या कोई संपन्न लड़का किसी गरीब घर की लड़की पसंद आने पर इस तरह का विवाह कर लाता है। एक अर्थ में देखें तो ये लड़की खरीदना ही हुआ जो कि गैरकानूनी है।
Read in Your Language: Roman(Eng) | Gujarati | Bangla | Gurmukhi | Teluguऔर अब एक गीत: प्यार के लिये जितने भी गीत लिखे गये हैं, जितने भी विशेषण दिये गये हैं उनमें से सबसे ज्यादा मुझे ये लाईनें पसंद हैं - छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा कि जैसे मंदिर में लौ दिये की। प्यार के प्रति कितनी ज्यादा गहरी बातें कहती हैं ये चंद लाईनें, इस गीत में प्यार की पवित्रता की बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति है।
ये गीत है 1966 में रिलिज हुई फिल्म ममता का जिसमें मुख्य भूमिका निभायी थी दादामुनि यानि अशोक कुमार, सुचित्रा सेन, धर्मेन्द्र और पहाड़ी सान्याल ने। इस फिल्म को असित सेन ने निर्देशित किया था। इस फिल्म का गीत-संगीत ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता थी, संगीत दिया था रोशन लाल नागरथ (Roshan Lal Nagrath) ने जो रोशन (Roshan) के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध थे यानि ऋतिक रोशन के दादाजी या कह लें राकेश और राजेश रोशन के पिता। और दिल को छू लेने वाले ये गीत लिखे थे मजरूह सुल्तानपुरी ने। इस खुबसूरत गीत को गाया है हेमंत कुमार और लता मंगेशकर ने।
इसी फिल्म में लता मंगेशकर का गाया एक और बहुत ही प्यारा गीत है - रहे ना रहे हम, महका करेंगे बन के कली, बन के सबा बागे वफा में और रहते थे कभी जिनके दिल में, जिसे फिर कभी।













“विवाह के बाकि तरीके भी रोचक लगे.
छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा कि जैसे मंदिर में लौ दिये की।….ये पंक्ति सच मे मधुर है क्यूंकि इसमे पवित्रता की इन्ताह झलकती है ….गीत के लिए आभार..”
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