दिल विल ४: धीरे धीरे मचल ऐ दिले बेकरार
पिछले एपिसोड में मैंने शादी के आठ प्रकार बताये थे, आज उनमें से कुछ के बारे में बताते हैं कि वो किस तरह के विवाह होते थे।
ब्रहमा विवाह (Brahma Marriage), इसमें लड़की का पिता या गार्जियन लड़के को पसंद करता है और वेद मंत्रों के बीच लड़की को मंहगे कपड़े और गहने देकर विदा करता है।
दैव विवाह (Daiva Marriage) में लड़की को गहनों में सजाकर किसी मंदिर के पुजारी को देव कार्य के लिये सौंप दिया जाता था, मुझे लगता है देवदासी प्रथा शायद इसी का नतीजा हो।
अर्शा विवाह (Arsha Marriage), इसमें लड़की के पिता को लड़के वाले गाय और (या) बैल उपहार स्वरूप देते हैं, इसे दहेज नही समझा जाता है बल्कि एक आदर के रूप में दिया जाता था।
आज के लिये इतना ही, विवाह के अन्य प्रकार में कल नजर डालेंगे।
Read in Your Language: Roman(Eng) | Gujarati | Bangla | Gurmukhi | Teluguऔर अब एक गीत: दिल के मचलने पर वैसे तो किसी का बस नही लेकिन फिर भी उससे ये तो कह सकते ही हैं ना, क्या पता मान जाये -
1966 में ऋषिकेश दा के निर्देशन में सजी एक बेहद खुबसूरत फिल्म आयी थी, नाम था अनुपमा, जिसका किरदार निभाया था शर्मिला टैगोर ने। शर्मिला के पिता की चैलेंजिग भूमिका की थी तरूण बोस ने, जो अपनी बीबी से बेइंतहा मोहब्बत करता है लेकिन बेटी के जन्म पर उसकी मृत्यु हो जाती है। और वो इसका कारण बेटी को मानता है लेकिन रात में नशे में वो बेटी से उतना ही प्यार भी करता है। तरूण बोस को हिंदी सिनेमा में शायद वो नाम और काम नही मिल पाया जिसका वो हकदार थे। अगर आपने ये फिल्म नही देखी है तो जरूर देखें, One of Hrishikesh Mukherjee’s best work। अन्य मुख्य कलाकारों में थे, धर्मेन्द्र, देवेन वर्मा और शशिकला।
इस फिल्म के गीत लिखे थे कैफी आजमी ने और संगीत दिया था वन एंड ओनली हेमंत कुमार ने, उन्हीं का खुद का गाया इस फिल्म का एक और बेहद खुबसूरत गीत है - “या दिल की सुनो दुनिया वालों या मुझको अभी चुप रहने दो, मैं गम को खुशी कैसे कह दूँ, जो कहते हैं उनको कहने दो“, फिल्म के अन्य गीतों में भीगी भीगी फिजा, ऐसी भी बातें होती हैं।
धीरे धीरे मचल ऐ दिले बेकरार, इस गीत को लता मंगेशकर ने गाया है, ये गीत फिल्माया गया था सुरेखा पारकर के ऊपर जो फिल्म में तरूण बोस की बीबी और शर्मिला टैगोर की माँ बनी थी। ये फिल्म बिमल रॉय को समर्पित की गयी थी।













“विवाह श्रृंख्ला रोचक लग रही है….क्योंकि इन सब से हम अनजान हैं…गीत खुबसुरत ….ऐ-दिले बेकरार कोई आता है….”
Regards