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ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा

January 25th, 2009 | 5 Comments | Posted in Patriotic Songs, kavi pradeep

लता मंगेशकर का गाया ये गीत किसी परिचय का मोहताज नही है, शायद ही ऐसा कोई दिन गया होगा जब शहीदों और देशभक्ति से संबन्धित बातें हुई हों और इस गीत का जिक्र ना आया हो। दिल को बहुत ही भावुक कर देना वाला ये गीत कवि प्रदीप ने लिखा था जिसे सी. रामचंद्र ने संगीत से सजाया था।

चीन के साथ लड़ाई खत्म होने के बाद 26 जनवरी 1963 में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में लताजी ने जवाहर लाल नेहरू की उपस्थिति में इसे गाया था। सुना यही है कि इस गीत को सुनकर नेहरूजी की आँखों में भी आँसू आ गये थे। और उन्हें कहना पड़ा, “बेटी तूने मुझे रूला दिया“।

इस गीत से जुड़े किसी भी कलाकार ने इस पर की गयी मेहनत के पैसे नही लिये थे बल्कि बाद में कवि प्रदीप ने इस गीत से मिलने वाली सारी रॉयल्टी ‘War Widows Fund‘ के नाम कर दी थी।

कवि प्रदीप ने 1962 में युद्ध के दौरान जब परमवीर विजेता मेजर शैतान सिंह भाटी की शहादत के बारे में सुना पढ़ा तो उस से प्रभावित हो उन्होंने ये गीत लिखा था। इस गीत को पहले आशा भोंसले गाने वाली थी क्योंकि उस समय सी रामचन्द्र और लताजी की खटपट चल रही थी। लेकिन कवि प्रदीप ने किसी तरह उनको मना लिया क्योंकि वो चाहते थे इस गीत को लताजी ही गायें।

इस गीत (और ऐसे ही कई अन्य देशभक्ति के गीत) को लिखने पर सरकार ने उन्हें “राष्ट्रीय कवि” की उपाधि से मनोनीत किया था।

ऐ मेरे वतन के लोगों
तुम ख़ूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सबका
लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर
वीरों ने है प्राण गंवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो -2
जो लौटके घर न आए -2

ऐ मेरे वतन के लोगों
ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो कुर्बानी

जब घायल हुआ हिमालय
खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो -2
फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा
सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद …

जब देश में थी दिवाली
वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में -2
वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो अपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद ..

कोई सिख कोई जाट मराठा -2
कोई गुरखा कोई मदरासी -2
सरहद पे मरनेवाला -2
हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर
वो खून था हिन्दुस्तानी
जो शहीद …

थी खून से लथपथ काया
फिर भी बंदूक उठाके
दस -दस को एक ने मारा
फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत -समय आया तो
कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों
अब हम तो सफर करते हैं -2
क्या लोग थे वो दीवाने
क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद …

तुम भूल न जाओ उनको
इसलिए कही ये कहानी
जो शहीद …
जय हिंद जय हिंद की सेना -2
जय हिंद , जय हिंद , जय हिंद

Aye Mere Watan Ke …

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5 Responses to “ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा”

  1. संगीता पुरी Says:

    वाह !!! सदाबहार गाना…..सबका पसंदीदा।

  2. समीर लाल Says:

    सुन्दर-मेरा प्रिय..आपको गणतंत्र दिवस की शुभकमानाऐं.

  3. alpana verma Says:

    shukriya is sadabahar geet ko–sach mein bahut bhavuuk kar jata hai yah geet..geet ke bol–dhun–aur gayaki—sab kuchh jaandar hain-sarvottam se bhi kahin uppar!..

  4. alpana verma Says:

    shukriya is sadabahar geet ko sunaney hetu-

    -sach mein bahut bhavuuk kar jata hai yah geet..geet ke bol–dhun–aur gayaki—sab kuchh jaandar hain-sarvottam se bhi kahin uppar!..

  5. mahendr mshra Says:

    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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