वंदे मातरम, वंदे मातरम

देशभक्ति के गीतों की त्रिवेणी का अंतिम गीत है वंदे मातरम् जो भारत का राष्ट्रीय गान है। इसे बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने बंगाली व संस्कृत मिश्रित भाषा मे लिखा था। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने वन्दे मातरम् गीत के पहले दो पद्य 1876 में संस्कृत में लिखे। इन दोनो पद्य में केवल मातृ-भूमि की वन्दना है। उन्होंने 1882 में आनन्द मठ नाम का उपन्यास बंगला में लिखा और इस गीत को उसमें सम्मिलित किया बाद में 1952 में इसी उपन्यास पर आनंदमठ नाम की फिल्म बनी। उस समय इस उपन्यास की जरूरत समझते हुये इसके बाद के पद्य बंगला भाषा में जोड़े गये, इन बाद के पद्य में दुर्गा की स्तुति है।

बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय सरकारी सेवा में थे और १८७० में जब अंग्रेजी हूकमत ने God save the King/Queen गाना अनिवार्य कर दिया तो इसके विरोध में वन्दे मातरम् गीत के पहले दो पैराग्राफ १८७६ में संस्कृत में लिखे। इन दोनो पैराग्राफ में केवल मार्त-भूमि की वन्दना है। बंकिम चन्द्र ने १८८२ में आनन्द मठ नाम का उपन्यास बंगला में लिखा और इस गीत को उसका हिस्सा बनाया। उस समय इस उपन्यास की जरूरत समझते हुये इसके बाद के पैराग्राफ बंगला भाषा में जोड़े गये। इन बाद के पैराग्राफ में दुर्गा की स्तुति है।

१९३७ में इस गीत के बारे में कांग्रेस में बहस हुई और जवाहर लाल नेहरु की अध्यक्षता वाली समिति ने इसके पहले दो पैराग्राफ को ही मान्यता दी। इस समिति में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद भी थे। पहले दो पैराग्राफ को मान्याता देने का कारण यही था कि इन दो पैराग्राफ में किसी देवी देवता की स्तुति नहीं थी और यह देश के सम्मान में थे।

यह गीत सबसे पहले १८८२ में प्रकाशित हुआ था और तब से १२५ साल हो गये हैं। इस गीत को पहले पहल ७ सितम्बर १९०५ में कांग्रेस अधिवेशन में राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। २००५ में इसके सौ साल पूरे होने के उपलक्ष में १ साल के समारोह का आयोजन किया गया। यह ७ सितम्बर को समाप्त हुआ। इस समापन का अभिनन्दन करने के लिये मानव संसाधन मंत्रालय ने इस गीत को ७ सितम्बर २००६ में स्कूलों में गाने की बात की। हालांकि बाद में अर्जुन सिंह ने संसद में कह दिया कि गीत गाना किसी के लिए आवश्यक नहीं किया गया है, जिसे गाना हो गाए, न गाना हो, न गाए।

- उन्मुक्तजी के लेख वंदे मातरम् से

फिल्म आनंदमठ में संगीत दिया था हेमंत कुमार ने और उसी फिल्म में इस गीत को उन्होंने स्वयं और लता मंगेशकर ने गाया था। उसके बाद से इस गीत को अलग-अलग अंदाज में कई बार गाया गा चुका है, उनमें से कुछ वर्जन आज आप यहाँ सुनिये -

वंदे मातरम, वंदे मातरम,
वंदे मातरम, वंदे मातरम
मातरम, वंदे

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
सस्य श्यामलां मातरंम् .
शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम्
फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् .
सुखदां वरदां मातरम्॥

कोटि कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले
द्विसप्त कोटि भुजैर्ध्रत खरकरवाले
के बोले मा तुमी अबले
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥

तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि ह्रदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे॥

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्॥

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं भरणीं मातरम्॥

वंदे मातरम - हेमंत कुमार (आनंदमठ 1952)

Vande Matram - Ana…

वंदे मातरम - लता मंगेशकर

Vande Mataram-Anan…

वंदे मातरम - लता मंगेशकर (आनंदमठ, 1952)

Vande Mataram - An…

वंदे मातरम - एक और अंदाज

Vande Matram.mp3

वंदे मातरम - ए आर रहमान

A R Rahman - Vande…
Share and Enjoy:
  • E-mail this story to a friend!
  • Google
  • del.icio.us
  • Technorati
  • Live
  • Facebook
  • MySpace
  • Digg
  • StumbleUpon
  • TwitThis
  • YahooMyWeb
Tags: , , , , and posted in Patriotic Songs

शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें

Comments

त्रिवेणी के तीनों अंक सहेजने योग्य गीत.

आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामना ….. जय हिंद वंदे मातरम
महेन्द्र मिश्र
जबलपुर.

बहुत अच्छा संकलन!
आपको, आपके परिवार एवं मित्रों को भी गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई!
वंदे मातरम!

अच्छी प्रस्तुति. गणतंत्र दिवस की बधाई.

बहुत सुंदर…. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं…!

जानकारी के लिए आभार ,मुझे तो लता जी वाला ही सुनने में सबसे अच्छा लगता है.
गणतंत्र दिवस की बधाई

Leave a comment

(required)

(required)