वाह वाह रम्ज़ सजण दी होर……आबिदा परवीन
किसी गीत को ढंग से समझने के लिये उस भाषा का अच्छे ढंग से आना जरूरी है लेकिन किसी संगीत का लुत्फ उठाने के लिये ये जरूरी नही कि आपको सुर-ताल-राग सभी का ज्ञान हो और गायकी की मिठास तो ना चाहते हुए भी कानों में घुसकर मिस्री सा मजा देकर रहेगी।
अभी जब मैं इंडिया गया था तो एक सुबह जब मैं अलसाया सा लेटा छुट्टी का आनंद ले रहा था मुझे ये बोल सुनायी दिये ‘वाह वाह रम्ज़ सजण दी होर‘ जो अपने ही घर के सिस्टम में बज रहे थे, आवाज तो मैं पहचान गया किसकी है लेकिन ये गीत पहली बार सुना, बस चुपचाप लेटा सुनता रहा, उसके बाद एक दूसरा सूफी गीत, फिर तीसरा। आते समय जाहिर है वो सीडी ही ले आया।
वाह वाह रम्ज़ सजण दी होर बुल्ले शाह की लिखी हुई है और उसे उतनी ही मधुरता से गाया है आबिदा परवीन ने, कहने को कुछ नही है बस आप भी सुनकर मजा लीजिये -
शायद आप इन्हें भी पढ़ना-सुनना पसंद करें
Comments
bahut der tak buffering ke baad bhi geet sunayee nahin diya..dobara koshish karungi.downlaod ka koi option nahin dikh raha.
es thra sa tuma dekta raha jasa tum ak fhul ho lag rarha hai ki kahi ak masum najuk si larki fhaslho sa gujerti
ABHIBHOOT HOON
IS BLOG SE DOOR JANE KEE HIMMAT NAHEE HAI TARUN JI
TEREE SOORT SE ALAG GEET TO SUNANE HAMESHA AATAA HOON HAMESHA KOREN BHIGOTA HOON TARUN JI APAKAA AABHAAREE HOON
BESH KIMATEE GEET SUNVANE WALA EK SIRPH EK HEE ANOKHEE SITE “GEET GATA CHAL” KO KOTI-KOTI DHANYAVAAD….













बड़ा लुत्फ लिया हमने भी -आपका आभार.