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हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है

November 23rd, 2008 | 5 Comments | Posted in Situational

1971 में संपूरण सिंह कालरा निर्देशित फिल्म आयी थी, नाम था मेरे अपने और यही संपूरण सिंह यानि गुलजार के फिल्म निर्देशन की शुरूआत भी थी। इस फिल्म की कहानी एक विधवा और कुछ दिशाहीन, बेरोजगार और अनाथ युवक (युवकों) के इर्दगिर्द घूमती है। फिल्म में मुख्य भूमिका थी मीना कुमारी, विनोद खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा की।

इस फिल्म के गीत लिखे थे खुद गुलजार साहब ने और संगीत दिया था सलील चौधरी ने, उस दौर की परिस्थितियों और व्यवस्था पर ही ये गीत ‘हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है” लिखा गया था। इस गीत को आवाज दी थी किशोर कुमार और मुकेश ने।

गुलजार की कलम की सब से बड़ी खूबी है उनके गीतों में शब्दों का चयन और उनका आपसी तालमेल, मेरी इसी बात को ये गीत भी साबित करता है। वो अपनी नज्मों और गीतों में ऐसे शब्द चुनते हैं जिसे शायद कोई दूसरा गीतकार कभी नही चुनना चाहेगा, जरा बानगी देखिये और फिर सुनकर देखिये।

हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है
बीए किया है, एमए किया, लगता है वो भी एंवें किया
काम नही है, वरना यहाँ आपकी दुआ से सब ठीक ठाक है।

आबोहवा, आबोहवा देश की बहुत साफ है,
कायदा है, कानून है, इंसाफ है
अल्लाह मियाँ जाने कोई जिये या मरे
आदमी को खून वून सब माफ है
और क्या कहूँ, छोटी मोटी चोरी, रिश्वत खोरी, देती है अपना गुजारा यहाँ
आप की दुआ से सब ठीक ठाक है

बाजारों के भाव मेरे ताऊ से बड़े
मकानों पर पगड़ी वाले ससुर खड़े
बुड्ढी भूख मरती नही, जिंदा है अभी
कोई इन बुजर्गों से कैसे लड़े
और क्या कहूँ, रोज कोई मीटिंग, रोज कोई भाषण
भाषण पे राशन नही है यहाँ
आप की दुआ से सब ठीक ठाक है

गोलमोल रोटी का पहिया चला
पीछे पीछे चांदी का रूपया चला
रोटी को बेचारी को चील ले गयी
चांदी लेके मुँह काला कौवा चला
और क्या कहूँ मौत का तमाशा
चला है बेतहाशा, जीने की फुरसत नही है यहाँ
आप की दुआ से सब ठीक ठाक है।

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यही गीत है, गीत पहेली नंबर ५ का सही जवाब और इसे सबसे पहले बताया अनामी ने (भैय्या अपना सही सही नाम तो बता देते, सही जवाब के लिये भी नाम क्या छुपाना) और उसके बाद RA ने सही जवाब के साथ थोड़ा और डिटेल भी दे दी, आप दोनों का ही बहुत शुक्रिया।

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5 Responses to “हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है”

  1. अफ़लातून Says:

    यह फिल्म(मेरे अपने) ‘संपूर्णतया’ बांग्ला फिल्म ‘आपन जन’ का अनुवाद थी। जैसे,’साउन्ड ऑफ़ म्युज़िक’ से ‘संपूर्णतया’ ‘परिचय’ प्रभावित थी ।
    गीत सुनवाने के लिए आभार ।

  2. Tarun Says:

    Aap sahi keh rahe hain Aflatoon ji, Tapan Sinha ne ye bangali film banayi thi.

  3. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    सही वक्त पर सही गाना और वह भी मनपसंद. सुनवाने के लिए आभार!

  4. परमजीत बाली Says:

    गीत सुनवाने के लिए आभार।

  5. उम्मेद सिनंह बैद ’साधक’ Says:

    प्यारी सी उस फ़िल्म का, इतना प्यारा गीत.
    याद दिलाकर आपने,मनवा लिया है जीत.
    जीत लिया है मनवा,आप जियें सौ वर्षों.
    रहें गुले-गुलजार,लिखें शुभ वर्षों-वर्षों.
    यह साधक कवि,मुरीद वर्षों से इस इल्म का.
    कैसा प्यारा गीत, प्यारी से उस फ़िल्म का.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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