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करना फकीरी फिर क्या दिलगीरी सदा मगन में रहना जी

November 4th, 2008 | 6 Comments | Posted in Spiritual (Bhajan)

पहेली नंबर ३ में बाजी मारी है सागर भाईसा ने। वो भजन था मीराबाई का लिखा हुआ जिसे फिल्म मीरा से लिया गया था। इसके संगीतकार थे पंडित रविशंकर जी और इसे गाया था वाणी जयराम। ये वो ही हैं जिन्होंने फिल्म गुड्डी का गीत बोले रे पपिहरा गाया था, अफसोस कि वाणी जयराम से उतना नही गवाया गया जितने की वो हकदार थीं।

गुलजार निर्देशित फिल्म मीरा १९७९ में रीलिज हुई थी जिसमें मुख्य भूमिका थी हेमा मालिनी की और राणा भोजराज का किरदार निभाया था विनोद खन्ना ने। अमजद खान बने थे बादशाह अकबर और शम्मी कपूर बने थे राणा भोजराज के पिता राजा विक्रमजीत। फिल्म फ्लॉप हो गयी थी लेकिन फिल्म में डाले गये मीराबाई के सभी भजन मधुर बन पड़े थे। उन्हीं में से एक जो मुझे ज्यादा पसंद है वो है करना फकीरी फिर क्या दिलगीरी सदा मगन में रहना जी।

गौरतलब है कि इसी नाम से सन् १९४५ में मीरा तमिल में भी बनी थी जिसमें मुख्य किरदार निभाया था एम एस शुब्बूलक्ष्मी ने।


Karna Fakiri Phir …

[सागर, समीरजी और रेवा तीनों को शुक्रिया।]

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6 Responses to “करना फकीरी फिर क्या दिलगीरी सदा मगन में रहना जी”

  1. Rewa Smriti Says:

    Abhi sunti hun is bhajan ko…ye kaise ho gaya ki abtak ye bhajan nahi sun paai hun 0-:

  2. Lovely Says:

    ह्रदय से धन्यवाद.बहुत अरसे से इसके बारे में जानकारी खोज रही थी,पर मिली नही.आज आचानक ब्लोग्वानी में इस टाइटल पर नजर पड़ गई

  3. सागर नाहर Says:

    धन्यवाद तरुण जी
    दरअसल बात यह है कि मीरा कृष्ण की दीवानी थी और मैं मीरा बाई का.. मीरा के भजन मुझे पता नहीं क्यों बचपन से ही बहुत सुहाते हैं। मैने कई गीत सुने हैं, पढ़े हैं और इच्छा है कि मीरा बाई की सारी रचनायें पढ़ूं।
    मीरा फिल्म मेरी अब तक की देखी गई सबसे बढ़िया फिल्मों में से एक है, नहीं यूं कहना चाहिये हिन्दी की सबसे बढ़िया फिल्मों में से एक है। यह फिल्म कितने मुश्किल हालातों में बनी इस ब्लॉग के पाठक यहाँ पूरा पढ़ सकते हैं।

  4. jitendra bhagat Says:

    सुंदर गीत सुनवाने के लि‍ए शुक्रि‍या।

  5. समीर लाल Says:

    हम भी तो सागर भाई की हाँ में हाँ मिलाये थे, हमारा नाम नहीं आया. :)

  6. sameer yadav Says:

    बहुत अच्छी जानकारी…वाणी जयराम ने गुनी लेकिन कम जाने गये जयदेव के संगीत निर्देशन में कुछ अच्छे गीत गाये हैं उनका संग्रह हो तो जरुर सुनाएँ.

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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