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हाल चाल ठीक ठाक है, सब कुछ ठीक ठाक है

1971 में संपूरण सिंह कालरा निर्देशित फिल्म आयी थी, नाम था मेरे अपने और यही संपूरण सिंह यानि गुलजार के फिल्म निर्देशन की शुरूआत भी थी। इस फिल्म की कहानी एक विधवा और कुछ दिशाहीन, बेरोजगार और अनाथ युवक (युवकों) के इर्दगिर्द घूमती है। फिल्म में मुख्य भूमिका थी मीना कुमारी, विनोद खन्ना और शत्रुघ्न [...]

[ More ] November 23rd, 2008 | 5 Comments | Posted in Situational |

गीत पहेली क्रमांक – ५

क्या आप गीत पहेली नंबर ५ में बजायी जा रही क्लिप को सुनकर गुलजार के लिखे इस गीत को पहचान सकते हैं। पहला हिंट तो दे ही चुके हैं, दूसरा हिंट ये है कि इसे दो गायकों ने गाया है। मजे की बात ये है कि जिस फिल्म का ये गीत है उसके दो कलाकार [...]

[ More ] November 22nd, 2008 | 4 Comments | Posted in Geet Paheli (Music Quiz) |

एक ब्रहामण ने कहा है कि ये साल अच्छा है

शायरों की जमात ही ऐसी होती है कि वो सपने देखती है, उन सपनों को फिर बुनती है और फिर तैयार होती है एक नज्म, एक गजल जिसे सुनकर हम कह उठते हैं, वाह ये गजल अच्छी है। आज के दौर में जहाँ आपसी मतभेद बड़ रहे हैं, ताकतवर लोग जुल्म पर जुल्म करने में [...]

[ More ] November 15th, 2008 | 7 Comments | Posted in Gazals |

क्या मौसम है, ऐ दिवाने दिल चल कहीं दूर निकल जायें

गीत पहेली नंबर ४ जितनी आसान थी उतने जवाब आये नही लेकिन फिर भी अभी तक पूछी सभी पहेलियों का उत्तर कोई ना कोई सही दे ही दे रहा है। इस बार की पहेली का सही उत्तर बताया RA ने और उनसे ये उम्मीद तो हम कर ही सकते थे। ये क्लिप थी फिल्म दूसरा [...]

[ More ] November 13th, 2008 | 3 Comments | Posted in Romantic |

गीत पहेली क्रमांक – ४

आज पेश है पहेली नंबर 4, आज की ये गीत पहेली बहुत ही आसान है, बगैर हिंट के ही शायद लोग पहचान जायें कि ये कौन सा गीत है। फिर भी एक हिंट दे देते हैं कि ये गीत जिन तीन लोगों में फिल्माया गया था उसमें से एक शशि कपूर हैं (थे)। चलिये अब [...]

[ More ] November 11th, 2008 | 3 Comments | Posted in Geet Paheli (Music Quiz) |

प्यार भरे दो शर्मीले नैन

आज का ये गीत है पाकिस्तान की एक फिल्म से और जिसने इसे गाया है वो हिन्दुस्तान में भी किसी परिचय के मोहताज नही। ये खुबसूरत गीत गाया है मेहदी हसन साहेब ने 1974 में रीलिज हुई पाकिस्तानी फिल्म चाहत के लिये। इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाया था शबनम और रहमान ने, रहमान ही [...]

[ More ] November 11th, 2008 | 3 Comments | Posted in Pakistani |

मधुशाला: सुन कल-कल छल-छल मधुघट से

सन् 1935 में 135 रूबाईयों (चार लाईन की छंद टाईप कविता) को अपने में सिमटी एक किताब छपी थी, नाम था मधुशाला और इसे लिखा था हरिवंश राय बच्चन ने। इसी मधुशाला ने हरिवंश राय बच्चन को नाम और प्रसिद्धि दोनों दिलाया। मधुशाला एक ट्राईओलोजी (Triology) का हिस्सा थी जो इन्होंने उमर खय्याम की रूबाईयों [...]

[ More ] November 7th, 2008 | 4 Comments | Posted in Non Filmy |

करना फकीरी फिर क्या दिलगीरी सदा मगन में रहना जी

पहेली नंबर ३ में बाजी मारी है सागर भाईसा ने। वो भजन था मीराबाई का लिखा हुआ जिसे फिल्म मीरा से लिया गया था। इसके संगीतकार थे पंडित रविशंकर जी और इसे गाया था वाणी जयराम। ये वो ही हैं जिन्होंने फिल्म गुड्डी का गीत बोले रे पपिहरा गाया था, अफसोस कि वाणी जयराम से [...]

[ More ] November 4th, 2008 | 6 Comments | Posted in Spiritual (Bhajan) |
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