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कहीं एक मासूम नाजुक सी लड़की फासलों से गुजरती रही

October 14th, 2008 | 11 Comments | Posted in Romantic

धीमा धीमा हल्का हल्का सा संगीत हो मीठे प्यारे बोल हों और मोहम्मद रफी की आवाज हो, तो बता सकते हैं क्या बना? इससे बना फिल्म शंकर हुसैन का ये गीत – कहीं एक मासूम नाजुक सी लड़की। ये फिल्म १९७७ में आयी थी और इस फिल्म में संगीत दिया था खैय्याम ने, और इस नाजुक सी लड़की के बोल लिखे थे कमाल अमरोही ने। रोमांटिक गानों में मेरे पसंदीदा गीतों में से एक बल्कि शायद ७० के दशक का एक बेहतरीन रोमांटिक गीत।

कही एक मासूम नाजुक सी लडकी
बहुत खुबसुरत मगर सांवली सी

मुझे अपने ख्वाबों की बाहों में पाकर
कभी नींद में मुस्कुराती तो होगी
उसी नींद में कसमसा-कसमसा कर
सिरहाने से तकिये गिराती तो होगी

वही ख्वाब दिन के मुंडेरों पे आके
उसे मन ही मन में लुभाते तो होंगे
कई साझ सीने की खामोशियों में
मेरी याद से झनझनाते तो होंगे
वो बेशाख्ता धीमें धीमें सुरों में
मेरी धुन में कुछ गुनगुनाती तो होगी

चलो खत लिखें जी में आता तो होगा
मगर उंगलियाँ कंपकपाती तो होगी
कलम हाथ से छुट जाता तो होगा
उमंगे कलम फिर उठाती तो होंगी
मेरा नाम अपनी किताबों पे लिखकर
वो दातों में उंगली दबाती तो होगी

जुबाँ से कभी अगर उफ् निकलती तो होगी
बदन धीमे धीमे सुलगता तो होगा
कहीं के कहीं पाँव पडते तो होंगे
जमीं पर दुपट्टा लटकता तो होगा
कभी सुबह को शाम कहती तो होगी
कभी रात को दिन बताती तो होगी


Kahin Ek Masoom Na…

इस फिल्म का एक और मधुर गीत है लता मंगेशकर की आवाज में – “आप यूँ फासलों से गुजरते रहे, दिल से कदमों की आहट आती रही“। इस गीत के बोल भी बहुत खुबसूरत हैं, जिन्हें लिखा था कैफी आजमी साहेब ने।

आप यूँ फासलों से गुजरते रहे
दिल से कदमों की आहट आती रही
आहटों से अंधेरे चमकते रहे
रात आती रही रात जाती रही

हो, गुनगुनाती रही मेरी तन्हाईयाँ
दूर बजती रही कितनी शहनाईयाँ
जिन्दगी, जिन्दगी को बुलाती रही
आप यूँ फासलों से गुजरते रहे
दिल से कदमों की आहट आती रही
आप यूँ…

कतरा कतरा पिघलता रहा आसमाँ -२
रूह की वादियों में ना जाने कहाँ
इक नदी, इक नदी दिलरूबा गीत गाती रही
आप यूँ फासलों से गुजरते रहे
दिल से कदमों की आहट आती रही
आप यूँ…

आप की गरम बाहों में खो जायेंगे
आप की नरम जानो पे सो जायेंगे, सो जायेंगे
मुद्दतों रात नींदें चुराती रही
आप यूँ फासलों से गुजरते रहे
दिल से कदमों की आहट आती रही
आप यूँ…


Aap Yun Faasalo S…

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11 Responses to “कहीं एक मासूम नाजुक सी लड़की फासलों से गुजरती रही”

  1. Dr.Arvind Mishra Says:

    वाह ! भावनाओं से लबरेज -बीते दिनों की याद दिलाती लाईनें !

  2. ranju Says:

    बहुत सुंदर मनपसंद गाने सुनाये आपने सुबह सुबह .शुक्रिया

  3. Raaj Says:

    Lata ji wala geet bhi bahut madhur hai, thanks

  4. MEET Says:

    “कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की ….” . ओह ! इस गीत से तो ज़िन्दगी भर का नाता है … आज सुबह सुबह सुनवा दिया … शुक्रिया.

  5. swapandarshi Says:

    Fantastic song indeed.

    However, I think this song was written by Jaanisaar Akhtar, father of Javed Akhtar.

  6. Manish Kumar Says:

    nischaya hi bada pyara sa nagma tha. sunaane ke liye aabhaar.

  7. sarvesh kumar Says:

    यार क्या प्यारी काब्य रचना की जी खुश हो गया

  8. sarvesh kumar Says:

    यार क्या प्यारी काब्य रचना की जी खुश हो गया भगवान आपका भला करे।

  9. Rewa Smriti Says:

    Simply beautiful song! I just listened it. Maine pahli baar suna hai is song ko and ye film jab bani thee tabhi mera janm bhi nahi hua tha :)

  10. maya bhatt Says:

    zindagi se kabhi bhi door nahi hua ye geet kahi aik masoom……,yaad dilane ka shukriya,England mai aise yadee kam aati hai,mai bhi hindi mai likhna chahti hoo,pls help,mujhe likhna aata hai but where to click i donot know

  11. SUSHIL KUMAR CHHOKER Says:

    कहीं एक मासूम नाजूक सी लड़की…….। अजी हमारे दिल के करीब है ये गाना। सुबह सुबह सुनकर आनंद आ गया जी।

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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