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आज कई दिनों बाद मेल बॉक्स देखा तो उसमें गुगल की लहर के साथ खेलने कुदने का निमंत्रण आया हुआ था। उसी समय निमंत्रण को स्वीकार किया और लॉगिन कर लिया। लॉगिन करते ही हिंदी ब्लोग जगत के कुछ महानुभावों को पहले से ही वहाँ लहरों के साथ अटखेलियाँ करते पाया, जिनमें थे - अमित (गुप्ता), देबू दा, मिर्ची सेठ, छोटे बैंगाणी यानि पंकज, जगदीश भाटिया और प्रतीक। हाथ पैर पटक पटक कर हमने भी दो लहरों को हवा दी - एक को हिंदी की दूसरी को सुडोकू की।

आप लोग सोच रहे होंगे वेव कैसे बनती हैं या क्रियेट होती हैं तो जितना मैंने ३-४ मिनट में ट्राई किया बता दूँ -
१. गुगले की भाषा में एक नयी वेन क्रियेट की यानि आम बोलचाल की भाषा में एक नया टॉपिक शुरू कर नया वार्तालाप शुरू किया।
२. उसमें यानि बहस में जिन जिन की हिस्सेदारी करवानी है उनके नाम ऐड किये (डन के बटन पर क्लिकर करते ही ये नाम सलेक्ट करने का बॉक्स उभर के आ जाता है)।


बस शुरू हो गया लहरों का खेला….

अब आप सोच रहे होंगे कि गुगल का ये नया शगुफा क्या है? पहली नजर में जो देखा उसके हिसाब से कहूँ तो गुगल लहर यानि गुगल वेव = थोड़ा ट्वीटर + थोड़ा फेसबुक + थोड़ा जीमेल + थोड़ा ओरकुट + थोड़ा चैट + बहुत सारे प्लग एंड प्ले प्लगिन (iPhone की एप्लीकेशन की माफिक); यही है गुगल वेव, अलग अलग सोशियल नेटवर्किंग की साईटस के जुदा जुदा पहलुओं का संगम। इसके साथ अभी बीटा की जगह प्रिव्यू का टैग लगा है और लहर की साईज के लिये कहूँगा - थोड़ा है थोड़े की जरूरत है। अगला प्रश्न आता है चलेगा कि नही? इसमें संभावना तो काफी दिख रही है लेकिन फाईनल प्रोडक्ट किस तरह से आकार लेता है इसमें बहुत कुछ निर्भर करता है और उससे भी ज्यादा इस बात पर कि इसे इंडियन यूजर कितना अपनाते हैं।

अगर और वक्त मिला तो डिटेल में लहरों में सर्फिंग की जायेगी वरना……

[कुछ विशेष कारणों के चलते अगले २-३ महीनों तक ब्लोगिंग और इंटरनेट से दूरी बनी रहेगी। लेकिन उसके बाद फिर से आपके साथ नयी नयी जानकारियाँ शेयर करने का सिलसिला जारी रहेगा।]

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