जानिये माइक्रोसोफ्ट वर्ड में छुपा एक रहस्य
आज एक ऐसा रहस्य बता रहे हैं जिसका बिल्लू बादशाह को भी शायद पता ना हो, नौकरी के अपने शुरूआती दिनों में एक और ऐसे रहस्य का पता था जो माइक्रोसोफ्ट एक्सेल में छुपा था। वो तो अब याद नही लेकिन वर्ड के अंदर छुपा ये रहस्य फिर से हाथ लग गया।
इसे माइक्रोसोफ्ट वर्ड वर्जन २००७ में करके देखा है उसमें भी काम करता है इसलिये बहुत ज्यादा चांसेज हैं कि पुराने सभी वर्जन में भी इसे काम करना चाहिये। अब आप खुद करके देखिये -
१. सबसे पहले माइक्रोसोफ्ट वर्ड प्रोग्राम ओपन कीजिये
२. अब जो नया डोक्यूमेंट खुलता है (या खुला है) उसमें नीचे दिये गये शब्दों को टाईप कीजिये
=rand(200,99)३. बस अब एंटर वाली कुंजी (ENTER) दबा दीजिये
और देखिये क्या का क्या हो जाता है, घबराईये नही आपके कंप्यूटर को कुछ नही होने वाला।
There is a hidden fact in microsoft word, it will be interesting to know if Bill gates himself is aware of this or not. Ok, do following to try yourself -
Open Microsoft word and in the new document type =rand(200,99) now press ENTER……..and see what happens and don’t worry it’s not going to harm your computer or software.
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This post has 21 comments
June 15th, 2009
बड़ी पुरानी आईटम निकाल कर लाये हो The quick brown fox
June 15th, 2009
बाप! रे बाप! 535 पृष्ठ। कौन पढ़ेगा इसे? हमारे लिए तो नया आईटम है।
June 15th, 2009
पौने तीन पेज की इबारत को कितनी बार रिपीट करने पर 535 पेज हुए होंगे?
June 15th, 2009
कर लिया जी कर लिया -द क्विक फॉक्स जम्प्स ….
June 15th, 2009
अरे तरूण भाई यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है कि बहुत रहस्यमयी हो और किसी गलती से आ गई हो। बिल गेट्स को पता हो या न हो लेकिन यह चीज़ कोई शगूफ़ा नहीं है।
दरअसल rand() माइक्रोसॉफ़्ट ऑफिस में प्रयोग होने वाली स्क्रिप्टिंग भाषा VBA का एक फंक्शन है रैन्डम वैल्यू देने के लिए। यदि इसका प्रयोग ऐसे ही किया जाए तो यह dummy text छाप देता है। इस फंक्शन में दिया पहला नंबर फंक्शन को बताता है कि कितने पैराग्राफ़ छापने हैं और दूसरा नंबर बताता है कि एक पैराग्राफ़ में कितनी पंक्तियाँ होनी चाहिए। निम्न आज़माईये, एक ही पैराग्राफ़ छपेगा।
वेब डिज़ाइनर अधिकतर Lorem Ipsum वाले टेक्स्ट को dummy text की भांति प्रयोग में लाते हैं किसी वेबसाइट का डिज़ाइन दिखाने के लिए। तो इसलिए निम्न आज़माईये:
इससे Lorem Ipsum वाले पाँच पैराग्राफ़ छप जाएँगे और प्रत्येक पैराग्राफ़ में 10 पंक्तियाँ होंगी!
June 15th, 2009
प्रोग्रामर्स को जब डेवेलपमेंट के दौरान विभिन्न परिक्षण करने होते होंगे जिसके लिये उन्हे ढेर सारा मैटर डॉक्यूमेंट में चाहिये होता होगा, यह कोड हो सकता है तब के लिये लिखा होगा।
ऐसे ही बहुत सारे ‘कोड्स’ कई कम्प्यूटर गेम्स में देखे गये हैं।
June 15th, 2009
मजेदार..
June 15th, 2009
वर्ड 2003 में करके देखा, नहीं हुआ ।
June 15th, 2009
In my word 07, the default language is spanish and 947 pages have been opened
June 15th, 2009
जो भी हो है बड़ा मजेदार !
June 15th, 2009
रहस्य रहस्य ना रहा, =rand(200,99) अब तेरा ऎतबार ना रहा
भईया यह पब्लिक है, यह सब जानती है ।
June 15th, 2009
आउट ऑफ कोर्स है हमारे लिये!
June 16th, 2009
@हिमाँशु,
आप rand की जगह पर यूज करके देखिये rand.old()
June 16th, 2009
@अमित,
बल्कि ऊपर जो हैडर में हर बार अलग अलग ईमेज डिस्प्ले होती है उसके लिये भी इसी rand() का ईस्तेमाल किया हुआ है। ये rand() काफी प्रोग्रामिंग भाषाओं में उपलब्ध है।
मालिक काहे जनता का मजा कम कर रहे हो, अपनी तो उम्र गुजरने को है VBA ईस्तेमाल करते करते,
कल आफिस में किसी ने ये पूछा तो याद आया उसको बताया और फिर सोचा चलो दूसरों के मजे के लिये (जो प्रोग्रामर नही) इसे पोस्ट कर दिया जाय। इसीलिये फनटिपस की कैटेगरी के अंतर्गत डाल दिया।
माइक्रोसोफ्ट की सपोर्ट की साईट में इस पर जरूर कोई ना कोई लेख मिल जायेगा।
हाँ lorem() कभी ईस्तेमाल नही किया और ना ही सोचा कि ये भी हो सकता है और इसी तरह से काम कर सकता है, उसके लिये तगड़ा धन्यवाद ।
ये हैल्प वाला लेख भी मिल गया, यहाँ सब कुछ विस्तार से समझाया है, बिल्लू बादशाह को सब खबर है
June 16th, 2009
उद्देश्य मज़ा खराब करना नहीं वरन् इसके पीछे का कारण बता लोगों का ज्ञानवर्धन करना था, खेल-खेल में सीखो टाइप!
हो जाता है कभी-२ तरूण भाई, ये सॉफ़्टवेयर इतने गहरे और कॉम्प्लेक्स होते हैं कि इनके प्रोग्रामरों के अतिरिक्त कदाचित् ही किसी को इनका पूरा ज्ञान होता है, आप और हम तो मुश्किल से 30-40 प्रतिशत ही जानते होंगे!
June 18th, 2009
bhai, mera to kahna hai ki shayad hi MS Word ke developer ko bhi poora gyan ho is tarah ke kisi bhi package ke bare me.. kyonki amooman sabhi developer apane develop kiye huye module ke hi ustad hote hain, bakiyon me buddhu..
June 26th, 2009
बहुत अच्छी जानकारी! अमित जी ने भी अच्छा लुक्मा जोडा है
August 26th, 2009
बड़ा
अच्छा लगा हिंदी में लिखने में
धीरेश
मुझको तो समझ नहीं आता ये होता कैसे हे
August 26th, 2009
REALLY IT IS GREAT TO TOGGLE BETWEEN TWO SCRIPTS THE SAME WE DO IN LIFE ITSELF EXHIBITING TWO INTERFACE OF REALITIES AS OLD ORDER CHANGETH YELDING PLACE TO NEW LEST ONE ORDER SHOULD CORREPT THE WORLD
October 13th, 2009
फुदु बनाने के लिए और कोई नहीं मिला क्या!
December 2nd, 2009
२००७ में करके देखा तो नहीं हुवा,
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