बच्चे और इंटरनेट सुरक्षा – भाग २

इंटरनेट पर बच्चों को सबसे बड़ा खतरा होता है पेडोफाइल्स (Pedophiles) से। पेडोफाइल्स वास्तव में एक वो लोग होते हैं जो पेडोफिलिया से ग्रसित होते हैं। पेडोफिलिया एक साइक्लोजिक डिसओडर है, जिससे ग्रसित व्यक्ति में बच्चों के प्रति सेक्स की इच्छा ज्यादा होती है। इसके कारणों का अभी तक पता नही चला है लेकिन माना जाता है ये डिसओडर ज्यादातर आदमियों में होता है। इस तरह के लोग बच्चों को अपना शिकार बनाने के लिये इंटरनेट का बहुतायत उपयोग करते हैं।

A Pedophile is an adult who is obsessed with and has a sexual attraction to children. Pedophiles are increasingly using the internet to organize and participate in rings that distribute and share nude/semi nude pictures of child, as well as to target and contact individual children.

अमेरिका में पिछले पाँच सालों में साइबरटिपलाईन में रिपोर्ट की जाने वाली इससे संबन्धित घटनाओं में ७५० प्रतिशत का ईजाफा हुआ है। इस तरह के लोग और घटनायें हर देश में बढ़ रहे हैं, सबसे बड़ी मुसीबत है कि इनके जाल में फंसे बच्चे कुछ बताते नही है।

आखिर कौन हैं ये लोग?
इन लोगों का कोई परफेक्ट प्रोफाइल नही होता, ये स्कूल टीचर हो सकता है, मिलिटरी में काम करने वाला या वकील या बच्चों का डाक्टर कोई भी हो सकता है लेकिन १९९९ के एफबीआइ इनवेस्टीगेशन के मुताबिक ये ज्यादातर २५ से ४५ की उम्र के गोरे लोग थे। एक दुर्भाग्य की बात और है कि ऐसे लोग ज्यादातर पारिवारिक दोस्तों में से होते हैं।

दूसरी समस्या है इंटरनेट में उपलब्ध गंदी गंदी साईटस ये आजकल हजारों लाखों की संख्या में उपलब्ध हैं जिसमें फोटो और विडियो दोनों ही होते हैं। अमेरिका में एक अध्य्यन के अनुसार ६२ प्रतिशत माँ-बाप को पता ही नही था कि उनके बच्चे ऐसी साईट्स में जाते हैं या ऐसी साईट्स में जाने के लिये सर्च करते हैं। कई लोग तो इस तरह के विषयों में लिखकर या साईट बनाकर ही अपने महीने की कमाई कर रहे हैं।

तीसरी और बढ़ती समस्या है अपराध से जुड़े विषयों की आसानी से उपलब्धता जिनमें बम, ड्रग्स, चोरी, जाली पहचान पत्र प्रमुख हैं। अलग अलग तरह के बम कैसे बनायें, कोकीन कैसे बनायें, जाली पहचान बनाने की विधि, आप नाम लीजिये ये सारे तरीके और इनकी विधियों में सूचना मिल जायेगी।

चौथी समस्या है साइबर दादागिरी (Cyberbullying), ईमेल के जरिये, मोबाइल, एसएमएस के जरिये इस तरह की दादागिरी होती है। इसका पता लगाने का सबसे सही तरीका है अपने बच्चे के व्यवहार में बदलाव नजर आना।

एक और समस्या है आपकी आनलाईन प्राइवेसी में दखलंदाजी, जिसमें एडवर्टाईजरस इंटरनेट के उपयोग करने के तरीके पर आपके बच्चे का प्रोफाइल बनाते हैं। इस तरह का प्रोफाइल बनाने के लिये मुख्य तीन सोर्स हैं -
   १. इंटरनेट में बच्चों का फ्री सर्विस वाली साईट्स में साइन-अप
   २. कांटेस्ट और स्वीपस्टेक्स में भाग लेना
   ३. बैनर वाले विज्ञापनों पर क्लिक करना

कुछ Advertisers इन सूचनाओं को स्पाइवेयर या एडवेयर से उपलब्ध सूचनाओं के साथ मिलाकर भी उपयोग में लाते हैं।

ध्यान रहे बच्चों के लिये या बच्चे के द्वारा अगर ईमेल एकाउंट बनाया जाता है तो उसमें कम से कम सूचनायें भरें, उतनी ही जिनके बिना एकाउंट नही बन सकता।

फ्री में कुछ नही मिलता, बच्चे अक्सर ऐसे गेम और सोफटवेयर डाउनलोड करने के लिये ढूँढते रहते हैं जो फ्री में उपलब्ध हों। इन फ्री के सोफ्टवेयर के साथ अक्सर आते हैं स्पाईवेयर या एडवेयर जो वास्तव में इन सोफ्टवेयर की छुपी हुई कीमत होती हैं।

अगले आलेख में देखेंगे कि इस तरह के समस्याओं से बच्चों को कैसे बचाया जा सकता है या कैसे इस तरह की चीजों के एकस्पोजर को कम कर सकते हैं।

[पढ़िये: भाग १]

This entry was posted in Internet & Technology and tagged , , , . Bookmark the permalink.

2 Responses to बच्चे और इंटरनेट सुरक्षा – भाग २

  1. जानकारी युक्त पोस्ट।
    और सही है – फ्री में कुछ नहीं मिलता।

  2. आने वाले समय की यह भीषण समस्‍या है, अभी तो भारत में इसे प्रारंभि‍क अवस्‍था में ही माना जाना चाहि‍ए। जानने की उत्‍सुकता रहेगी कि‍ इस पर नि‍यंत्रण कैसे कि‍या जा सकता है।