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इस लेख में देखते हैं कि हम बच्चों के इंटरनेट के उपयोग में किस तरह से निगरानी कर सकते हैं -

१. कंप्यूटर को हमेशा ऐसे कमरे में रखें जहाँ आप आसानी से बच्चों के इंटरनेट क्रियाकलापों को देख सकें यानि बैडरूम की जगह फैमली रूम।
२.बच्चों की उस क्रियाकलाप को खास ध्यान दें जिसमें वो किसी के साथ इंटरनेट पर चॉट करते हैं।
३. कभी कभी बच्चे के साथ इंटरनेट पर एक साथ सर्फ करें, इससे आपको बच्चे के शौक का पता तो चलेगा ही साथ में ये भी पता चल सकता है कि वो किस तरह की साईट पर जाते हैं।
४. बच्चों को विज्ञापन और काम के कंटेंट में अंतर बतायें।
५. इंटरनेट से खरीदारी के लिये नियम बनायें या अगर उन्हें खरीदना ही है तो आप की उपस्थिति में बच्चे खरीदें या आप से खरीदवायें।
६. बच्चे की इंटरनेट

क्रियाकलाप के आधार पर इंटरनेट का उपयोग करने की समय सीमा निर्धारित करें।

ये तो कुछ बातें थी जो निगरानी में मदद कर सकती है, इसके अलावा कुछ और बातें भी हैं। जैसे इंटरनेट पर सर्च करने पर कुछ ऐसा कंटेंट आ जाता है जो बच्चों के लिये ठीक नही। इस तरह की समस्या के लिये आप चाहें तो कंटेंट फिल्टर करने वाले सोफ्टवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं। गुगल सेफ सर्च का आप्शन देता है चाहें तो उसे भी प्रयोग में ला सकते हैं। इंटरनेट एक्सप्लोलर में टूलस के मेनु में इंटरनेट आप्शन में जाकर केंटेंट के टैब में आप रेटिंग भी सेट कर सकते हैं।

बच्चों के ईमेल एकाउंट में स्पॉम के रूप में भी गलत कंटेंट आ सकते हैं तो उसके लिये ईमेल फिल्टर का सोफ्टवेयर ईस्तेमाल कर सकते हैं। बच्चों को दोस्त बनाकर रखें तो शायद आपको वो सब अपने आप ही पता चल जायेगा जो मेल उनको आती हैं। इसके अलावा दो ऐसी साईट हैं जहाँ आपको काफी काम की जानकारी मिल सकती है जैसे वो IP एड्रैस किसका है, उसका नाम, ईमेल पता, फोन इत्यादि। ये साईट हैं - VisualRoute or Whois ।

pop-up blocker लगाकर रखें, कई बार इनमें भी गलत टाईप के कंटेंट दिखायी पड़ते हैं। अगर आपके बच्चे किसी खास साईट पर जाकर चॉट करते हैं तो आप भी उस साईट पर एक एकाउंट बनाकर रखें जिसमें अपने आप को बच्चा ही दिखायें और चॉट करके देखें। आपको पता चल जायेगा किस तरह के लोग और भाषा वहाँ चल रही है।

आजकल एक और प्रोब्लम है जिसे शायद आप ब्लोग के नाम से जानते हों। जहाँ एक तरफ ये पोजिटिव अनुभव करा सकते हैं लेकिन इसके कई गलत यूज भी होते हैं। पोपुलर साईट mySpace हमेशा इन्हीं कारणों से चर्चा में रहती है।

बच्चों को ये भी बता कर रखें कि वो हर उस चीज को डाउनलोड नही कर सकते जिसमें फ्री लिखा हो। अगले आलेख में थोड़ा और बातें करते हुए इस सीरिज का समापन करेंगे।

[पढ़िये: भाग १, भाग २, भाग ३]

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