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पिछले आलेख में मैने बताया था कि बच्चों को इंटरनेट के द्वारा क्या क्या खतरा (Threats) हो सकता है, आज बात करते हैं उन तरीकों की जिससे हम इन खतरों को कम कर सकते हैं। आपके पास उन खतरों से बचाव के लिये मुख्यतयाः ३ तरीके हैं - शिक्षा (जानकारी), निगरानी, और कंप्यूटर सोफ्टवेयर।

You have three lines of defence to protect your kids from the threats I have mentioned in previous article and these are - Education, Monitoring, and Computer Software.

इनमें सबसे ज्यादा जरूरी है जानकारी (शिक्षा), आपको अपने बच्चों से इंटरनेट के बारे में चर्चा करती रहनी चाहिये और उन्हें सलाह देती रहनी चाहिये कि वो इंटरनेट में क्या कर सकते हैं, क्या नही और ऐसा क्यों। उसके कारण बताने की कोशिश जरूर करिये वरना बच्चों की उत्सुकता आपके इस प्रयास पर पूरी तरह पानी फेर देगी। शायद आप अपने कंप्यूटर में सोफ्टवेयर लगा इस तरह की खतरे वाली चीज ब्लोक कर लें या फिल्टर कर ले लेकिन हो सकता है बच्चा कहीं और से भी इंटरनेट का इस्तेमाल करे, इसलिये जानकारी (या शिक्षा) का होना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

निगरानी करने का मतलब ये नही है कि आप डंडा लेकर उनके सिर पर खड़े हो जायें बल्कि निगरानी का सही तरीका है कि आप बच्चे की इंटरनेट एक्टिविटी में खुद भी दिलचस्पी लें।

सोफ्टवेयर टूल या एप्लीकेसन के इस्टतेमाल से आप काफी कुछ तक प्रोटेक्ट कर सकेंगे लेकिन ये सिर्फ उसी कंप्यूटर तक कारगर होगा जो आपका अपना है, आपके घर पर है। इनमें मुख्यरूप से पांच प्रकार के सोफ्टवेयर (या टूल) आते हैं - वेबसाईट फिल्टरिंग सोफ्टवेयर (Website Filtering Software), ई-मेल फिल्टरिंग सोफ्टवेयर (E-mail Filtering Software), एंटीवायरस सोफ्टवेयर (Antivirus Software), फायरवॉल सोफ्टवेयर (Firewall Software) और मालिसियस सोफ्टवेयर डिटेक्शन सोफ्टवेयर (Malicious Software - detection software)। साथ में कुछ अन्य सोफ्टवेयर जो हो सकता है आपके कंप्यूटर में हों और आपको पता ना हो, जिनकी कोई जरूरत नही होती।

बच्चों को जानकारी उपलब्ध करायें
बच्चों से बातें करके उन्हें इंटरनेट के फायदे नुकसान बतायें, साथ में ध्यान रहे कि बच्चों की उम्र के हिसाब से ये फायदे-नुकसान का गणित हो। क्योंकि हो सकता है कुछ बड़े बच्चे (किशोरावस्था वाले) के लिये ठीक हो लेकिन छोटे के लिये (प्रीस्कूल या किंडरगार्टन वाले) नही। ऐसा भी हो सकता है कि किसी बात को कुछ मोडरेट विचारों वाले माँ-बाप बच्चों के लिये उपयुक्त माने लेकिन थोड़ा कंजरवेटिव (रूढ़िवादी) माँ-बाप उसे सही नही मानते हों।
कुछ साधारण बातें जो ध्यान देनी चाहिये -

१. इंटरनेट में मिलने वाला हर कोई अजनबी है (अगर आप किसी को और उसके बारे में पहले से जानते हों उसे शायद आप अजनबी ना कहें) चाहे वो कितनी ही अच्छी बातें क्यों ना करता हो। ध्यान रहे शैतानी दिमाग वाले ज्यादातर इंटरनेट में वैसा नही दिखाते जैसे वो वास्तव में होते हैं। ये लोग हमेशा ही इंटरनेट में मीठी बातें करते हैं।

२. बच्चों को ऐसे लोगों से भी बातें नही करनी चाहिये (दूर रहना चाहिये) जो बूरी तरह से बातें करते हैं। असली नाम जानने में जोर देते हैं या फोटो वगैरह भेजने को कहते हैं या फोन पर बात करना चाहते हैं।

३. बच्चे किसी भी वेबसाईट या व्यक्ति को कभी भी अपनी पर्सनल इनफोरमेशन ना दें खासकर पता, फोन और स्कूल का नाम।

४. बच्चों को अपने माँ-बाप के अलावा किसी को भी कोई पासवर्ड वगैरह नही बताना चाहिये।

५. बच्चों को किसी भी ऐसे व्यक्ति से पर्सनली नही मिलना चाहिये जिनसे वो इंटरनेट में मिले हों या चॉट (chat) में बात करी हो।

६. बच्चों को अपनी फोटो कभी भी किसी अजनबी को ना भेजनी चाहिये ना इंटरनेट में पोस्ट करनी चाहिये।

७. बच्चों को किसी अजनबी या अनजाने व्यक्ति के साथ कभी भी वेबकैमरा या माइक्रोफोन चालू करके चॉट नही करनी चाहिये।

८. इंटरनेट में जो भी पढ़ें उस पर आंखमूद कर यकीन भी नही करना चाहिये।

ये मानकर ना चलें कि बच्चों को इन सब बातों का पहले से ही पता होगा, एक सर्वेक्षन के अनुसार ९ से १६ साल तक के बच्चों में ३३ प्रतिशत किसी अनजान व्यक्ति से फेस-टू-फेस मिलने वाले खतरों से अनजान थे।

अगले आलेख में निगरानी से संबन्धित कुछ बातें करेंगे।

[पढ़िये: भाग १, भाग २]

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