बस और नहीं
May 15, 2007 | Kuhu

नहीं, बस और नहीं बुलाऊंगी मैं
कहूँ, तुम याद नहीं आते तो झूठी कहलाऊंगी मैं।
हर बार बह जाते हैं गुस्सैल लहरों में
अब रेत घर नहीं बनाऊँगी मैं।
तुम भी तो कभी बढ़ाओ पहला कदम
अब न पहल कर पाऊँगी मैं।
कह दो तुम्हें नहीं है इंतज़ार मेरा
ये झूठ तो न कह पाऊँगी मैं।
कतरा भर ज़िन्दगी जीभर जी लूँ ज़रा
गर और मिली तो ख़ुशी से मर ही जाऊंगी मैं।
क्यों हो तुम खामोश खड़े
आ जाओ, आ भी जाओ, अब न चल पाऊँगी मैं।
Popularity: 38% [?]
Posted in
अभिनन्दन. मुम्बई में रहनेवाली कुहू ने दस महीने पहले ब्लोग्गिंग की दुनिया में कदम रखा। कुहू का मुख्य ब्लॉग इंग्लिश में है और 



May 15th, 2007 at 3:19 am
तुम भी तो कभी बढ़ाओ पहला कदम
अब न पहल कर पाऊँगी मैं।
अच्छा लिखा है आपने !
घुघूती बासूती
May 15th, 2007 at 4:38 am
बढ़िया लिखा है. लिखते रहो. बधाई.
May 15th, 2007 at 7:06 am
घुघूती,
धन्यवाद।
समीर,
आपको भी धन्यवाद।
May 15th, 2007 at 7:13 am
अच्छा लिखा! आगे लिखना जारी रखें!
May 15th, 2007 at 11:21 am
सुन्दर.
May 16th, 2007 at 12:38 am
मन के कोने से यह आवाज आती है
खड़ी हो राह में वह कहीं और कुछ कह डालू आज
जब सामने मिल जाती है वह कभी तो देखता ही रह जाता हूँ…।
बहुत सुंदर लिखा है…प्रेम का सच्चा प्रसंग उभरता दिख रहा है…।
May 16th, 2007 at 5:31 am
Beautiful poem.
June 13th, 2007 at 10:23 am
[…] तुम भी तो कभी बढ़ाओ पहला कदमअब न पहल कर पाऊँगी मैं।कह दो तुम्हें नहीं है इंतज़ार मेराये झूठ तो न कह पाऊँगी मैं। [पूरी कविता पढें …] […]
June 13th, 2007 at 12:50 pm
बहुत सुंदर कविता।